पटना, 31 अगस्त (अशोक “अश्क”) बिहार में ट्रैफिक और सड़क जाम की गंभीर समस्या से निपटने के लिए एक बड़ी पहल की गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राज्य में सात नए बाइपास परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। ये बाइपास डुमरांव, अरवल, दाउदनगर, औरंगाबाद, सिंहेश्वर, समस्तीपुर और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) क्षेत्र में बनाए जाएंगे। इनकी कुल लंबाई 74 किलोमीटर होगी और इन पर करीब 6040 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक इन बाइपासों का निर्माण कार्य शुरू करना है।

बक्सर जिले का डुमरांव शहर लंबे समय से भीषण जाम की समस्या से परेशान है। यहां प्रस्तावित 5.5 किलोमीटर लंबा बाइपास एनएच-120 से शुरू होकर पुराने भोजपुर से सटे ओवरब्रिज को पार करते हुए पटना-बक्सर एनएच-922 से जुड़ेगा। इसके बन जाने से शहर के भीतर से गुजरने वाले भारी वाहनों का दबाव कम होगा और स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी। फिलहाल जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है।
अरवल में बनने वाला 12.8 किलोमीटर लंबा बाइपास एक ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है, जिस पर 600 करोड़ रुपये की लागत आएगी। यह बाइपास पटना-औरंगाबाद एनएच पर जाम की समस्या को दूर करेगा, खासकर अस्वल-जहानाबाद एनएच-33 और एनएच-139 के भगत सिंह चौक जैसे जामग्रस्त इलाकों में।
यह परियोजना 22.5 किलोमीटर लंबी होगी और दोनों शहरों में जाम की स्थायी समस्या का समाधान करेगी। फिलहाल इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इस मार्ग के बन जाने से दाउदनगर और औरंगाबाद के बीच यातायात अत्यधिक सुगम हो जाएगा।
मधेपुरा जिले के सिंहेश्वर प्रखंड में 11.23 किलोमीटर लंबा बाइपास बनेगा, जो हीरो शोरूम से शुरू होकर मानिकपुर तक जाएगा। यह बाइपास सिंहेश्वर और मधेपुरा शहर दोनों के यातायात को सुगम बनाएगा।
पश्चिम चंपारण स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व इलाके में 10.5 किलोमीटर लंबा बाइपास प्रस्तावित है। वर्तमान में पर्यटकों और स्थानीय लोगों को वहां तक पहुंचने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस बाइपास से ना सिर्फ आवागमन आसान होगा, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
समस्तीपुर में राजघाट (जितवारपुर) से मुसरीघरारी तक 11.55 किलोमीटर लंबा बाइपास प्रस्तावित है। इसके बन जाने से बेगूसराय और दरभंगा की ओर जाने वाले वाहनों की दूरी लगभग 5 किलोमीटर कम हो जाएगी, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।
इन सातों बाइपास परियोजनाओं की डीपीआर तैयार की जा रही है, कुछ जगहों पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। रिपोर्ट पास होते ही निर्माण एजेंसियों का चयन किया जाएगा और कार्य शुरू हो जाएगा।
राज्य में तेजी से बढ़ रहे वाहन दबाव और ट्रैफिक जाम की समस्या को देखते हुए यह परियोजना लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बाइपासों से न केवल यातायात में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय व्यापार, पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी सकारात्मक दिशा मिलेगी।

