पटना, 9 सितंबर (अशोक “अश्क”) बिहार की राजनीति में समाजवाद का गढ़ कहे जाने वाला मधेपुरा जिला एक बार फिर चुनावी हलचल का केंद्र बन गया है। भूपेंद्र नारायण मंडल और बीपी मंडल जैसे समाजवादी पुरोधाओं की धरती पर एक बार फिर से चुनावी शतरंज बिछ चुकी है, और सभी प्रमुख दलों की नजर इस जिले की चार विधानसभा सीटों पर टिकी है।
यह वही मधेपुरा है जहां से शरद यादव और लालू यादव जैसे दिग्गज नेता एक-दूसरे को पराजित कर संसद पहुंचे और केंद्र सरकार में मंत्री बने। यही नहीं, पप्पू यादव की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत भी यहीं से हुई थी, जब उन्होंने 1990 में सिंहेश्वर से निर्दलीय जीत दर्ज की थी।

मधेपुरा जिले की चार विधानसभा सीटों में से दो मधेपुरा सदर और सिंहेश्वर (सुरक्षित) पर फिलहाल राजद का कब्जा है, जबकि बिहारीगंज और आलमनगर पर जदयू काबिज है। चुनावी समीकरणों के लिहाज़ से यह जिला बेहद अहम बन चुका है, इसलिए हर बार की तरह इस बार भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का लंबा पड़ाव यहीं रहने वाला है। वे कोसी और सीमांचल में चुनावी सभाओं की शुरुआत भी यहीं से करते रहे हैं।
मधेपुरा सदर सीट पर फिलहाल राजद विधायक प्रो. चंद्रशेखर का कब्जा है, जो लगातार तीन बार से यहां जीत दर्ज कर चुके हैं। हालांकि, इस बार टिकट की दावेदारी में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
प्रणव प्रकाश, जो एक मल्टी नेशनल कंपनी की नौकरी छोड़कर पिछले 10 महीनों से क्षेत्र में सक्रिय हैं, टिकट की दौड़ में मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।
शांतनु यादव (पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव के पुत्र),
प्रो. कुमार चंद्रदीप, जिलाध्यक्ष जयकांत यादव और पूर्व जिलाध्यक्ष प्रो. अरविंद यादव सहित एक दर्जन से अधिक नेता इस सीट से टिकट की चाहत रखते हैं।
इसके अलावा बीपी मंडल के पौत्र निखिल मंडल भी जदयू से स्वाभाविक दावेदार माने जा रहे हैं, जो 2020 में त्रिकोणीय मुकाबले में चुनाव हार चुके हैं।
विधायक चंद्रहास चौपाल की सीट पर भी इस बार मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।
पूर्व विधायक अमित भारती, डॉ. कुंदन कुमार सुमन, मुखिया वीरेंद्र शर्मा सहित कई नाम टिकट की दौड़ में हैं।
हालांकि, डॉ. रमेश ऋषिदेव के अलावा राजद से कोई अन्य चेहरा सक्रिय रूप से सामने नहीं आया है।
आलमनगर से विधानसभा उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव और बिहारीगंज से विधायक निरंजन मेहता के नाम लगभग तय माने जा रहे हैं। इन सीटों पर जदयू के सामने फिलहाल कोई बड़ा चुनौतीकर्ता नजर नहीं आ रहा है।
आरपी यादव के पुत्र डॉ. सत्यजीत यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष विजेंद्र यादव, और युवा जदयू नेता श्वेत कमल उर्फ बौआ यादव भी राजनीतिक चर्चाओं में हैं और संभावित उम्मीदवारों की सूची में शामिल हैं।
समाजवादी विरासत की इस धरती पर आगामी विधानसभा चुनावों में सियासी जंग बेहद दिलचस्प होने वाली है। दिग्गजों के साथ-साथ नए चेहरों की भी मजबूत मौजूदगी मधेपुरा को बिहार की राजनीति का केंद्रबिंदु बना रही है।

