पटना, 10 सितम्बर (अशोक “अश्क”) बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई ने एक बड़े साइबर फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह ने आधार सिस्टम में सेंध लगाकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और उन्हें साइबर अपराधियों को बेचकर बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया था। ईओयू ने मधेपुरा जिले से तीन साइबर अपराधियों रामप्रवेश कुमार, मिथिलेश कुमार और विकास कुमार को गिरफ्तार किया है।

ईओयू की जांच में सामने आया है कि आरोपी ईसीएमपी (Aadhaar Enrolment Client Multi Platform) सॉफ्टवेयर को अवैध रूप से डाउनलोड कर, ऑपरेटरों की मदद से फर्जी वेबसाइटों के जरिए आधार डाटा जमा करते थे। बाद में इस डाटा को संशोधित कर फर्जी दस्तावेज बनाए जाते थे और इन्हें साइबर अपराधियों को ऊंचे दाम पर बेच दिया जाता था, जो इनका इस्तेमाल धोखाधड़ी और अन्य साइबर अपराधों में करते थे।
ईओयू के अनुसार, गिरोह ने यूसीएल सोर्स कोड, आयुष्मान डॉट साइट और अन्य 6-7 नकली वेबसाइटों का इस्तेमाल कर डाटा इकट्ठा किया। ये अपराधी लोगों की जानकारी के बिना उनके बायोमेट्रिक डाटा और पहचान दस्तावेजों का दुरुपयोग करते थे। इसके लिए उन्होंने सिलिकन फिंगरप्रिंट तकनीक का भी इस्तेमाल किया।
जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह का नेटवर्क बिहार के बाहर अन्य राज्यों तक फैला हुआ है। गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि उन्होंने यूट्यूब और गूगल से तकनीकी जानकारी हासिल कर फर्जी पोर्टल बनाना सीखा और इनका इस्तेमाल कर लोगों की निजी जानकारी चुराई।
इस मामले में ईओयू थाने में मंगलवार को प्राथमिकी दर्ज की गई है। गिरफ्तार तीनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आने की संभावना है। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही इस गिरोह से जुड़े और सदस्यों की गिरफ्तारी हो सकती है।
ईओयू की इस कार्रवाई को राज्य में साइबर अपराध रोकने की दिशा में बड़ी सफलता माना जा रहा है।

