नई दिल्ली, 12 सितम्बर (अशोक “अश्क) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मणिपुर के संभावित दौरे से ठीक पहले राज्य की राजनीति में बड़ा हलचल देखने को मिला है। मणिपुर के उखरुल जिले के फुंग्यार निर्वाचन क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कम से कम 43 पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पार्टी से सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है।पार्टी के एक स्थानीय नेता ने गुरुवार को इस घटनाक्रम की पुष्टि की।

इस सामूहिक इस्तीफे में भाजपा फुंग्यार मंडल के अध्यक्ष, महिला मोर्चा, युवा मोर्चा और किसान मोर्चा के प्रमुख, साथ ही विधानसभा क्षेत्र के कई बूथ अध्यक्ष शामिल हैं। इन सभी ने एक संयुक्त बयान जारी कर अपने फैसले की वजह बताई, जिसमें उन्होंने भाजपा के भीतर “परामर्श की कमी, समावेशिता का अभाव और जमीनी नेतृत्व के प्रति सम्मान की कमी” को कारण बताया।
इस्तीफा देने वालों का बयान: सामूहिक बयान में भाजपा नेताओं ने कहा, “पार्टी और उसकी विचारधारा के प्रति हमारी निष्ठा अटूट रही है। लेकिन हम मौजूदा हालात से बहुत चिंतित हैं। पार्टी के भीतर जिस तरह से निर्णय लिए जा रहे हैं, उसमें स्थानीय नेतृत्व और समुदाय की भावनाओं की अनदेखी हो रही है।”
उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने समुदाय और मणिपुर की जनता के कल्याण के लिए काम करते रहेंगे, भले ही वह भाजपा के बाहर क्यों न हो।
इस सामूहिक इस्तीफे का समय राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को मणिपुर का दौरा कर सकते हैं। यह मणिपुर में मई 2023 में भड़की जातीय हिंसा के बाद उनकी पहली संभावित यात्रा होगी।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष इंफाल घाटी में रहने वाले मेइती समुदाय और पहाड़ी क्षेत्रों के कुकी-जो समुदाय के बीच जातीय हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें 260 से अधिक लोगों की मौत हुई और हजारों लोग विस्थापित हो गए थे।
जातीय हिंसा के बाद मणिपुर में राजनीतिक अस्थिरता लगातार बनी हुई है। फरवरी 2025 में मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद केंद्र सरकार ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया था।
नगा बहुल उखरुल जिले से भाजपा पदाधिकारियों का यह सामूहिक इस्तीफा केंद्र और राज्य नेतृत्व के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि स्थानीय समुदायों के बीच असंतोष गहराता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन मुद्दों को जल्द सुलझाया नहीं गया, तो मणिपुर में भाजपा की साख को गहरी चोट पहुंच सकती है, खासकर तब जब प्रधानमंत्री खुद वहां दौरे पर जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के दौरे से पहले यह घटनाक्रम भाजपा के लिए राजनीतिक और प्रतीकात्मक रूप से दोनों तरह से बड़ा झटका है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व स्थानीय असंतोष को कैसे संबोधित करता है और मणिपुर में शांति व स्थिरता की दिशा में क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

