पटना, 13 सितम्बर (अशोक “अश्क”) बिहार की राजनीति में इस बार एक नई लहर देखने को मिल सकती है। ज्योतिपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शुक्रवार को ऐलान किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में राज्य की सभी 243 सीटों पर गौ सेवकों को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतारा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कदम गौ हत्या के विरोध में उठाया गया है और पहली बार देश में यह मुद्दा वोट बैंक का आधार बनेगा।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पटना जंक्शन के पास महावीर मंदिर परिसर में दिवंगत आचार्य किशोर कुणाल की प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है और न ही भविष्य में पार्टी बनाने का इरादा है। उनका मकसद सिर्फ इतना है कि गौ हत्या के खिलाफ खड़े मतदाताओं की आवाज सुनी जाए और सरकारें इस पर ठोस कदम उठाएं।
उन्होंने कहा, “हमने सभी राजनीतिक दलों से संपर्क किया, लेकिन किसी ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसलिए अब हम सीधे जनता के पास जा रहे हैं। जो उम्मीदवार गौ हत्या रोकने का संकल्प लेंगे, उन्हें ही वोट देने की अपील की जाएगी।”
इस उद्देश्य को लेकर शंकराचार्य ने ‘गौ मतदाता संकल्प यात्रा’ की शुरुआत करने की घोषणा की। यह यात्रा शनिवार को सीतामढ़ी स्थित मां जानकी मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद शुरू होगी। यात्रा के दौरान वे बिहार के सभी जिलों में जाकर लोगों से संवाद करेंगे और उन्हें गौ रक्षा के नाम पर वोट करने के लिए प्रेरित करेंगे।
इस घोषणा से बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि यदि यह मुहिम व्यापक समर्थन पाती है तो हार्डकोर हिंदू वोटबैंक में बिखराव संभव है, जिससे परंपरागत राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम अगले महीने घोषित होने की संभावना है और इस नई पहल ने पहले ही सियासी तापमान बढ़ा दिया है।

