नई दिल्ली, 22 सितम्बर (अशोक “अश्क”) भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच आज न्यूयॉर्क में महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होने जा रही है। यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब भारत और अमेरिका के बीच कई मुद्दों को लेकर रिश्ते तनावपूर्ण हैं। दोनों देशों के विदेश मंत्री संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के इतर मिलेंगे, और इस बैठक पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ-साथ दोनों देशों की जनता की नजरें टिकी हुई हैं।

यह बैठक डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाने के फैसले के बाद जयशंकर और रुबियो के बीच पहली मुलाकात होगी। इस फैसले ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में भारी खटास ला दी है। माना जा रहा है कि इस बैठक में टैरिफ, व्यापार संतुलन और अन्य द्विपक्षीय मसलों पर विस्तार से चर्चा होगी।
दिलचस्प बात यह है कि इसी दिन वॉशिंगटन में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार पर मंत्रिस्तरीय वार्ता भी शुरू हो रही है। भारत की ओर से वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करेंगे। दोनों देशों के अधिकारी मतभेदों को दूर कर एक संतुलित और लाभकारी व्यापार समझौते की दिशा में कदम बढ़ाना चाहते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप के जनवरी में राष्ट्रपति बनने के बाद भारत और अमेरिका के रिश्तों में लगातार गिरावट देखी गई है। मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष पर ट्रंप द्वारा की गई मध्यस्थता की पेशकश को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया था, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में पहली बार सार्वजनिक रूप से तल्खी देखने को मिली थी।
इसके अलावा रूस से भारत की तेल खरीद को लेकर भी अमेरिका ने कई बार नाराजगी जताई है। ट्रंप प्रशासन की ओर से भारत को सार्वजनिक रूप से चेतावनियां भी दी गईं। हाल ही में H-1B वीजा पर ट्रंप प्रशासन के फैसले ने हजारों भारतीय पेशेवरों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। इस कदम की वजह से भारत में काफी नाराजगी देखी गई है।
जयशंकर और रुबियो की यह मुलाकात दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और व्यापारिक रिश्तों को पटरी पर लाने की दिशा में अहम साबित हो सकती है। उम्मीद की जा रही है कि बातचीत के जरिए टैरिफ और वीजा जैसे विवादित मुद्दों पर कुछ सकारात्मक समाधान निकल सकेगा।
भारत और अमेरिका वैश्विक मंचों पर दो बड़े लोकतांत्रिक देश हैं और उनके मजबूत रिश्ते न सिर्फ दक्षिण एशिया बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण हैं। अब देखना यह होगा कि जयशंकर-रुबियो की मुलाकात इस दिशा में कोई ठोस पहल कर पाती है या नहीं।

