नई दिल्ली, 9 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) दिल्ली की एक अदालत ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने आप नेता सोमनाथ भारती को एक आपराधिक मानहानि मामले में वकील के रूप में पेश होने से रोकने की मांग की थी। यह मामला भारती की पत्नी लिपिका मित्रा द्वारा सीतारमण के खिलाफ दर्ज शिकायत से जुड़ा है।

सीतारमण ने अपनी याचिका में कहा था कि सोमनाथ भारती, बतौर पति, इस मामले में व्यक्तिगत और आर्थिक रूप से लाभार्थी हैं, इसलिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार वह इस केस में पेश नहीं हो सकते। विशेष रूप से उन्होंने नियम 6 और 9 का हवाला दिया, जिसमें हितों के टकराव और अनुचित प्रतिनिधित्व को लेकर प्रावधान हैं।
हालांकि, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पारस दलाल ने सीतारमण की दलील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि कानून पति-पत्नी को स्वतंत्र व्यक्ति मानता है और वे एक-दूसरे के खिलाफ या समर्थन में न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि जीवनसाथी द्वारा अभियोजन या बचाव के लिए अधिकतम सजा या मुआवजे की मांग पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
इसके साथ ही अदालत ने लिपिका मित्रा की उस अर्जी को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने पिछले सुनवाई में अनुपस्थित रहने पर लगाए गए ₹5,000 के जुर्माने से राहत मांगी थी। अब इस मामले में 1 नवंबर को पूर्व-समन साक्ष्य के लिए अगली सुनवाई तय की गई है।
लाइव लॉ के मुताबिक, मित्रा ने सीतारमण पर भारतीय दंड संहिता, 2023 की धारा 356(1) और 356(2) के तहत आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि सीतारमण ने 17 मई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके खिलाफ अपमानजनक और मानहानिकारक बयान दिए, जिनका उद्देश्य लोकसभा चुनाव के दौरान सोमनाथ भारती की छवि को नुकसान पहुंचाना था।

