पटना, 14 अक्तूबर (पटना डेस्क) बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के अनुसंधान निदेशालय द्वारा “कीटनाशी अवशेष न्यूनीकरण की रणनीतियाँ” विषय पर एक उच्च स्तरीय ब्रेनस्टॉर्मिंग सत्र का आयोजन किया गया। सत्र की अध्यक्षता अनुसंधान निदेशक डॉ. ए. के. सिंह ने की, जबकि कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने संदेश के माध्यम से सतत एवं सुरक्षित कृषि प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया।

सत्र में कृषि, कीटविज्ञान, मृदा विज्ञान, कृषि रसायन, खाद्य प्रौद्योगिकी आदि विषयों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। वैज्ञानिकों ने फसलों में कीटनाशी अवशेषों को कम करने के लिए जैविक अपघटन मॉडल, बायोपेस्टीसाइड, फेरोमोन ट्रैप, एचपीएलसी व जीसी–एमएस/एमएस तकनीकों के उपयोग तथा सूक्ष्मजीव आधारित समाधान प्रस्तुत किए।
डॉ. ए. के. सिंह ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम रासायनिक निर्भरता छोड़कर ज्ञान-आधारित समेकित कीट प्रबंधन (IPDM) अपनाएं। उन्होंने कहा कि कीटनाशी अवशेषों की निगरानी और जोखिम मूल्यांकन के लिए वैज्ञानिक मॉडल विकसित करना आवश्यक है।
सत्र में प्रमुख संकल्पों में राज्य स्तरीय अवशेष निगरानी डेटाबेस बनाना, सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देना, और ‘पेस्टीसाइड रेजिड्यू मिटिगेशन एक्शन प्लान’ के लिए एक बहु-विषयक टास्क फोर्स का गठन शामिल रहा।
कार्यक्रम के अंत में यह स्पष्ट हुआ कि अवशेष-मुक्त और पर्यावरण-अनुकूल कृषि प्रणाली ही भविष्य की खाद्य सुरक्षा और कृषि पारिस्थितिकी की स्थिरता का आधार बनेगी।

