
वैशाली (अशोक “अश्क”) बिहार के वैशाली जिले के पटेढ़ी बेलसर प्रखंड अंतर्गत चकगुलमुद्दीन हाई स्कूल में स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। स्कूल के प्रधानाचार्य जुल्फेकार अली खान द्वारा बिना पूर्व सूचना के कार्यक्रम के समय, स्थान और परंपरा में बदलाव करने से स्थानीय ग्रामीणों, छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिली। मामले के तूल पकड़ने पर शिक्षा विभाग ने प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। जब तक जवाब नहीं मिलता, उनका वेतन भी रोक दिया गया है। बताया गया कि विद्यालय में हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झंडारोहण का कार्यक्रम सुबह 9 बजे निर्धारित स्थान पर आयोजित किया जाता था। लेकिन इस वर्ष प्रधानाचार्य ने इस परंपरा को तोड़ते हुए झंडारोहण का समय सुबह 7:30 कर दिया और झंडा भी निर्धारित स्थान की बजाय किसी अन्य जगह फहराया गया। इतना ही नहीं, वर्षों से इस मौके पर प्रसाद स्वरूप जलेबी वितरित करने की परंपरा रही है, लेकिन इस बार उसकी जगह खुरमा और बिस्कुट बांटे गए। इन सभी बदलावों की न तो छात्रों को जानकारी दी गई, न ही अभिभावकों और ग्रामीणों को। नतीजतन, कई लोग समय से नहीं पहुंच पाए और कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। इससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। स्थिति बिगड़ते देख प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालना पड़ा। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत किया और मामले की जांच का आश्वासन दिया। जिला शिक्षा विभाग ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है। प्राचार्य जुल्फेकार अली खान को 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। उन्हें स्पष्ट करना होगा कि आखिर क्यों बिना सूचना के कार्यक्रम के समय, स्थान और प्रसाद में बदलाव किया गया। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह स्वतंत्रता दिवस जैसे पावन मौके की गरिमा का अपमान है। उनका कहना है कि ऐसे कार्यक्रम सार्वजनिक सहभागिता से होते हैं, जिनमें छात्रों, अभिभावकों और गांव वालों की भागीदारी जरूरी होती है। कार्यक्रम में बदलाव कर प्राचार्य ने न सिर्फ लोगों की भावना को आहत किया, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया की भी अनदेखी की। अब देखना यह है कि प्राचार्य के जवाब से शिक्षा विभाग कितना संतुष्ट होता है और मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल स्कूल का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।

