
समस्तीपुर (अशोक “अश्क”) समस्तीपुर जिले के विद्यापतिनगर प्रखंड अंतर्गत मिर्जापुर गांव समेत कई इलाके इन दिनों गंगा की बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। खासकर गरीब तबके के लोग जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। मवेशी पालक बिंदेश्वर दास और उनके जैसे दर्जनों ग्रामीण बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। चूल्हे ठंडे हैं, घरों में पानी भरा है, पीने के पानी का संकट है, और लोग नमक-रोटी खाकर किसी तरह जिंदा हैं। बिंदेश्वर दास बताते हैं, चारा नहीं मिल रहा, जंगल काटकर मवेशी को किसी तरह खिला रहे हैं। बच्चों के लिए दूध नहीं है, रात में जलाने को मोमबत्ती तक नहीं। कोई सरकारी मदद नहीं मिली है। उनकी आंखों में आंसू और चेहरे पर मायूसी साफ नजर आती है। बाढ़ के चलते लोग अपने घर छोड़कर ऊंचे स्थानों खासकर बांध और सड़क किनारे शरण लिए हुए हैं, लेकिन वहां की हालत भी बदतर है। चारों ओर कीचड़, मच्छर और बारिश ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। महिलाएं, छोटे बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान हैं। बाढ़ से बेघर हुए लोगों को चोरी का डर भी सता रहा है। मिर्जापुर गांव के एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि वे रात को घर की निगरानी के लिए वापस लौटते हैं, क्योंकि पानी में डूबे घरों में चोरी की आशंका बनी रहती है। बांध पर अस्थायी झोपड़ियों में रह रहे इन लोगों के पास न पर्याप्त खाना है, न पीने का पानी और न ही कोई सुरक्षा। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल यही स्थिति होती है। गंगा का जलस्तर बढ़ता है, गांव डूबते हैं, लोग पलायन करते हैं, और फिर कुछ नहीं बदलता। बिंदेश्वर दास कहते हैं, हर साल लोग आते हैं, तस्वीरें लेते हैं, वादे करते हैं, लेकिन इस बार कोई नहीं आया। न पंचायत, न प्रशासन। फिलहाल गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर ऊपर है, और रिपोर्टों के अनुसार आने वाले दिनों में जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है। इससे पहले से प्रभावित गांवों में फिर से बाढ़ की स्थिति बन सकती है। गांवों में न राहत शिविर हैं, न राशन, न पीने का पानी। लोग खुले आसमान के नीचे, प्लास्टिक की चादरों के नीचे, किसी तरह अपने परिवार को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

