नई दिल्ली, 27 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) गाजा में इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम लागू हो चुका है, लेकिन हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। दोनों पक्षों के बीच कई अहम मुद्दों पर मतभेद कायम हैं। इजरायली सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि उन्हें नहीं लगता हमास निरस्त्रीकरण करेगा, जबकि युद्ध-पश्चात समझौते में उसने हथियार छोड़ने की प्रतिबद्धता जताई थी। इसी बीच गाजा में अंतरराष्ट्रीय सेना की तैनाती को लेकर भी तैयारियां चल रही हैं।
एक इजरायली रिपोर्ट के मुताबिक, युद्धविराम समझौते के तहत जल्द ही इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) गाजा में प्रवेश कर सकती है। इस बल में तीन मुस्लिम बहुल देशों — इंडोनेशिया, पाकिस्तान और अजरबैजान — के सैनिक शामिल हो सकते हैं। ISF को गाजा की आंतरिक सुरक्षा, सीमाओं की निगरानी और हथियारों की तस्करी रोकने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडोनेशिया को पहले से ही अमेरिकी मध्यस्थता वाले अब्राहम समझौते के तहत संभावित साझेदार माना गया था। वहीं, परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान ने हाल ही में सऊदी अरब के साथ रक्षा गठबंधन किया है और अमेरिका का करीबी सहयोगी माना जाता है। अजरबैजान के भी इजरायल के साथ मजबूत रक्षा और तकनीकी संबंध हैं, जिससे ISF में इन देशों की भागीदारी रणनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को हुई कैबिनेट बैठक में कहा कि देश अपनी सुरक्षा पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल यह तय करेगा कि ISF में कौन से सैनिक स्वीकार्य होंगे। नेतन्याहू ने कहा, “अगर हमें सुरक्षा खतरा होगा, तो हम उसका कड़ा जवाब देंगे। हमारी सुरक्षा पर नियंत्रण केवल हमारा होगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि हमास के समझौते के उल्लंघन और इजरायली बंधकों के शवों की वापसी में देरी के कारण समझौते का दूसरा चरण प्रभावित हुआ है। नेतन्याहू ने यह भी साफ कर दिया कि अमेरिका को इजरायल के सैन्य निर्णयों पर कोई नियंत्रण नहीं होगा, जिससे दोनों देशों के बीच मतभेद की अटकलें फिर तेज हो गई हैं।

