पटना, 25 नवम्बर (पटना डेस्क) नई सरकार के गठन के बाद मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की पहली बैठक में राज्य के तकनीकी, औद्योगिक और शहरी विकास को नई दिशा देने वाले छह अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार ने साफ किया कि आने वाले वर्षों में बिहार की नीति तकनीक-आधारित अर्थव्यवस्था और आधुनिक शहरी ढांचे पर केंद्रित होगी।

बैठक का सबसे बड़ा फैसला बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन की स्थापना रहा। सरकार का मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में AI की भूमिका तेजी से बढ़ रही है, इसलिए शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, नगर प्रबंधन और औद्योगिक सेक्टर में इस तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। मिशन के तहत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, रिसर्च फेलोशिप, इनोवेशन प्रोग्राम और वैश्विक टेक कंपनियों से साझेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार और स्टार्टअप के अवसर तैयार होंगे।
कैबिनेट ने पूर्वी भारत के सबसे बड़े टेक हब के निर्माण के लिए हाई-लेवल कमेटी गठित करने की मंजूरी दी। यह कमेटी डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, मेगा टेक सिटी और फिनटेक सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स का रोडमैप तैयार करेगी। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं के क्रियान्वयन से बिहार पहली बार वैश्विक तकनीकी उद्योग के मानचित्र पर मजबूती से उभरेगा।
शहरी दबाव को कम करने और नियोजित विकास को बढ़ावा देने के लिए 11 नए सैटेलाइट/ग्रीनफील्ड टाउनशिप बनाने की भी स्वीकृति दी गई। ये टाउनशिप आधुनिक प्लानिंग, बेहतर ट्रांसपोर्ट और उच्चस्तरीय नागरिक सुविधाओं से लैस होंगी।
इसके साथ ही बंद चीनी मिलों को चालू करने और नई मिलें लगाने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाने का निर्णय लिया गया। बैठक में राज्य को ग्लोबल बैक-एंड हब बनाने और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एक्शन प्लान तैयार करने को भी मंजूरी दी गई।

