नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (अशोक “अश्क”) सुप्रीम कोर्ट में देश के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर जूता फेंकने वाले वकील राकेश किशोर की मुश्किलें अब और बढ़ सकती हैं। भारत के अटॉर्नी जनरल ने उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की अनुमति दे दी है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ वकील विकास सिंह और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गुरुवार को यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जे. बागची की पीठ को दी।

विकास सिंह ने बताया कि उन्होंने अटॉर्नी जनरल से इस संबंध में अनुमति ली है और अदालत से तत्काल सुनवाई की मांग की है। सॉलिसिटर जनरल ने भी इस पर सहमति जताते हुए कहा कि “संवैधानिक निष्ठा” पर सवाल उठ रहे हैं और यह घटना अदालत की गरिमा पर हमला है।
गौरतलब है कि वकील राकेश किशोर ने पिछले सप्ताह कोर्ट रूम में भारत के मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंका था। इसके बाद उन्होंने मीडिया को दिए बयान में कहा कि उन्हें इस हरकत का कोई पछतावा नहीं है। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने घटना का समर्थन करते हुए टिप्पणी की कि “ऐसा पहले ही हो जाना चाहिए था।”
इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “माननीय CJI ने इस मामले में उदारता दिखाई है, इससे स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्था इन घटनाओं से प्रभावित नहीं होती।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि न्यायपालिका को इससे “संवेदनशील नहीं होना चाहिए, लेकिन कमजोर भी नहीं समझा जाना चाहिए।”
विकास सिंह ने सोशल मीडिया पर इस घटना का समर्थन करने वाले पोस्ट पर रोक लगाने के लिए ‘जॉन-डो’ आदेश की भी मांग की। जस्टिस बागची ने कहा कि सोशल मीडिया एल्गोरिदम इस प्रकार की सामग्री को वायरल करता है और इससे पैसे भी कमाए जाते हैं।
विकास सिंह ने कहा, “कुछ लोग कह रहे हैं कि भगवान विष्णु इसका फैसला करेंगे। भगवान विष्णु कभी ऐसी हिंसा का समर्थन नहीं कर सकते।” इस पर अदालत ने कहा कि शास्त्रों ने भी हिंसा का समर्थन नहीं किया है।
अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट आगे इस पर क्या रुख अपनाता है। मगर इतना तय है कि राकेश किशोर के खिलाफ अब कानूनी शिकंजा कसना तय है।

