नई दिल्ली 28 अगस्त (अशोक “अश्क”) भारतीय टेक फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो (अब इटरनल लिमिटेड) को GST विभाग ने बड़ा झटका दिया है। बेंगलुरु स्थित GST जॉइंट कमिश्नर ने कंपनी को 40 करोड़ रुपये की टैक्स डिमांड थमाई है। यह मांग जुलाई 2017 से मार्च 2020 के बीच हुए ऑडिट और जांच के आधार पर की गई है।

इस डिमांड में:
₹17.19 करोड़ GST
₹21.42 करोड़ ब्याज
₹1.71 करोड़ की पेनल्टी शामिल है।
इटरनल लिमिटेड ने रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया कि वह इस टैक्स डिमांड को कोर्ट में चुनौती देगी। कंपनी ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि कानूनी आधार पर फैसला उनके पक्ष में आएगा और वे जल्द ही अपील की प्रक्रिया शुरू करेंगे।
हाल ही में जारी वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के नतीजों के मुताबिक, इटरनल ने शानदार 7,521 करोड़ रुपये की कुल कमाई की। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की इसी तिमाही के 4,442 करोड़ रुपये से 69.31% ज्यादा है।
हालांकि, खर्चों को घटाने के बाद कंपनी का शुद्ध मुनाफा मात्र ₹25 करोड़ रहा, जो साल दर साल तुलना में 90% की गिरावट है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹253 करोड़ का लाभ हुआ था।
साल 26 के पहली तिमाही में इटरनल के क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट ने पहली बार फूड डिलीवरी बिजनेस से ज्यादा नेट ऑर्डर वैल्यू दर्ज की।
ब्लिंकिट की NOV: ₹9,203 करोड़
*फूड डिलीवरी की NOV: ₹8,967 करोड़
कंपनी के मुताबिक, यह ऐतिहासिक बदलाव कंपनी के बिजनेस डायनामिक्स में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
जोमैटो ने 20 मार्च 2025 को अपना नाम बदलकर इटरनल लिमिटेड कर लिया था। BSE और NSE पर 9 अप्रैल 2025 को नया नाम आधिकारिक रूप से लिस्ट हुआ।
2008 में दीपिंदर गोयल और पंकज चड्ढा ने मिलकर FoodieBay नाम से वेबसाइट शुरू की।
2010 में नाम बदलकर Zomato रखा गया।
2012-2013 में जोमैटो ने दुबई, यूके, फिलीपींस, तुर्की और ब्राजील जैसे देशों में कदम रखा।
यह भारत का पहला फूडटेक यूनिकॉर्न बना, जिसकी वैल्यू $1 बिलियन से अधिक है।
अगस्त 2022 में कंपनी ने ब्लिंकिट का अधिग्रहण कर ग्रॉसरी डिलीवरी में भी कदम रखा।
GST डिपार्टमेंट की टैक्स डिमांड भले ही इटरनल के लिए एक कानूनी चुनौती है, लेकिन कंपनी का फोकस तेजी से बढ़ते क्विक कॉमर्स सेगमेंट और नई रणनीतिक पहल पर है। आने वाले समय में कोर्ट का फैसला और कंपनी की अपील इस विवाद का भविष्य तय करेगी।

