
पटना, 25 जनवरी (पटना डेस्क) बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। परिवार में कलह के बाद अब पार्टी के भीतर भी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। मनेर से आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने चुनावी हार को लेकर सीधे पार्टी नेतृत्व को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि जमीनी कार्यकर्ताओं और मजबूत दावेदारों की अनदेखी ही पार्टी की हार की सबसे बड़ी वजह बनी।

भाई वीरेंद्र ने आरोप लगाया कि वर्षों से पार्टी के लिए संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं का टिकट काट दिया गया, जबकि बाहरी और कमजोर उम्मीदवारों को मौका दे दिया गया। उन्होंने कहा कि चुनावी रणनीति में गंभीर चूक हुई और उसी का खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा। उन्होंने इसे नेतृत्व की बड़ी विफलता बताया।गौरतलब है कि 2020 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी को 75 सीटें मिली थीं, लेकिन 2025 में पार्टी मात्र 25 सीटों पर सिमट गई। तेजस्वी यादव मुश्किल से नेता प्रतिपक्ष बन पाए हैं। हालात ऐसे हैं कि अगर एक भी विधायक साथ छोड़ता है तो उनकी कुर्सी खतरे में पड़ सकती है। इस हार के बाद लालू परिवार में भी खींचतान तेज हो गई है। रोहिणी आचार्य ने संजय यादव समेत कई वरिष्ठ नेताओं पर सवाल उठाए थे।तेजस्वी यादव की चुप्पी भी पार्टी के लिए नई परेशानी बनती जा रही है।

पटना के चर्चित गर्ल्स हॉस्टल मामले पर उनकी खामोशी पर पार्टी के अंदर और बाहर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के बाद तेजस्वी अब तक आक्रामक नजर नहीं आए हैं।भाई वीरेंद्र यहीं नहीं रुके। उन्होंने बिना नाम लिए पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और उनके बच्चों पर हमला बोलते हुए कहा कि कैमूर, रोहतास और बक्सर तीनों जिलों की जिम्मेदारी एक ही व्यक्ति को दी गई और तीनों जिलों को “बेच दिया गया।” बक्सर में पार्टी सिर्फ एक सीट जीत पाई। उन्होंने कहा कि नाम के समाजवादी नेता अगर टिकट बांटेंगे तो किसी भी दल का यही हाल होगा।एक बैठक में विजय मंडल का टिकट कटने पर नाराजगी जताते हुए भाई वीरेंद्र ने कहा कि जब यादव को ही टिकट देना था तो विजय मंडल में क्या कमी थी। बाहर के लोगों को टिकट देने का फैसला समझ से परे है।

