नई दिल्ली, 20 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) मुंबई अंडरवर्ल्ड पर बनी फिल्मों में अगर कोई फिल्म कल्ट का दर्जा रखती है, तो वह है रामगोपाल वर्मा की 2002 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘कंपनी’। यह फिल्म उस दौर में आई जब बॉलीवुड में रियलिस्टिक सिनेमा की कमी थी, और ‘कंपनी’ ने एक झटका देकर सबका ध्यान खींचा

रामगोपाल वर्मा ने इससे पहले 1998 में ‘सत्या’ बनाई थी, जिसने गैंगस्टर सिनेमा को नया मोड़ दिया। भीखू म्हात्रे (मनोज बाजपेयी) का किरदार आज भी याद किया जाता है। इसी सफलता के बाद वर्मा ने ‘कंपनी’ बनाई, जिसकी कहानी दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन की दोस्ती और दुश्मनी से प्रेरित थी।
फिल्म में अजय देवगन और विवेक ओबेरॉय।मुख्य भूमिकाओं में थे। विवेक ने ‘चंदू’ का किरदार निभाया, जो छोटा राजन से प्रेरित था। अपने किरदार में ढलने के लिए विवेक ने मुंबई की झोपड़पट्टी में रहना शुरू किया, टपोरी भाषा सीखी और लुक बदल डाला।
फिल्म में मोहनलाल ने पुलिस कमिश्नर का किरदार निभाया, जो रियल लाइफ में मुंबई पुलिस कमिश्नर धनुषकोड़ी शिवानंदन से प्रेरित था। उन्होंने अंडरवर्ल्ड पर कड़ा प्रहार किया था और मकोका कानून लागू करवाने में अहम भूमिका निभाई थी।
‘कंपनी’ को जयदीप साहनी ने लिखा और संदीप चौटाला ने संगीत दिया। “गंदा है धंधा ये” और “तुमसे कितना प्यार है” जैसे गाने काफी लोकप्रिय हुए। फिल्म करीब 8 करोड़ के बजट में बनी और 25 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया।
फिल्म का नाम ‘कंपनी’ दाऊद की ‘डी-कंपनी’ से लिया गया था। रामगोपाल वर्मा ने इस फिल्म के लिए कई पुलिस अधिकारियों और अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों से रिसर्च की थी। इस फिल्म ने मुंबई अंडरवर्ल्ड को बेहद रियल तरीके से परदे पर उतारा और आज भी इसे गैंगस्टर फिल्मों की श्रेणी में मील का पत्थर माना जाता है।

