
अररिया भारत-नेपाल सीमा से राजेश कुमार शर्मा। भारत-नेपाल सीमा से सटे नेपाल के बिराटनगर में सक्रिय संगठित अपराध के नेटवर्क पर नेपाल पुलिस ने शिकंजा कस दिया है। मोरंग जेल में कैदियों से जुड़े वित्तीय अनियमितता मामले में गिरफ्तार किए गए कुख्यात अपराधी अभिषेक गिरी से पूछताछ के बाद जांच का दायरा तेजी से बढ़ा है। नेपाल पुलिस अब गिरी के आपराधिक नेटवर्क,उसके कथित आर्थिक साझेदारों और अपराध से अर्जित संपत्तियों की गहन जांच कर रही है। इस क्रम में सीमांचल क्षेत्र के दर्जनों प्रभावशाली और सफेदपोश लोग भी पुलिस की निगरानी में है। मोरंग के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कवित कटवाल ने बताया कि अभिषेक गिरी के अपराधों के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन, अपराध से अर्जित धन के निवेश तथा उससे जुड़े व्यक्तियों की भूमिका की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि अवैध कमाई को किन-किन माध्यमों से वैध कारोबार और संपत्तियों में बदला गया।
-दो साल में करोड़ों की संपत्ति,अब हर निवेश की होगी जांच
पुलिस सूत्रों के अनुसार अपहरण के एक मामले में आठ वर्ष की सजा काटने के बाद 19 मार्च 2023 को जेल से रिहा हुआ अभिषेक गिरी महज दो वर्षों के भीतर करोड़ों रुपये की संपत्ति का मालिक बन गया। आरोप है कि जेल से बाहर आने के बाद उसने राजनीतिक गतिविधियों का सहारा लेकर खुद को सामाजिक रूप से सक्रिय दिखाया,जबकि पर्दे के पीछे अपने सहयोगियों के जरिए आपराधिक गतिविधियां जारी रखीं। नेपाल पुलिस ने बैंकों,वित्तीय संस्थानों, कंपनी रजिस्ट्रार,घरेलू व लघु उद्योग कार्यालय समेत कई सरकारी विभागों से गिरी और उससे जुड़े कारोबारों का ब्योरा मांगा है। जेल से रिहाई के बाद स्थापित ‘गिरी फाउंडेशन’ के माध्यम से हुए लेन-देन और उससे जुड़े लोगों की संपत्तियों की भी जांच की जा रही है।
-बेनामी संपत्ति और हवाला जैसे लेन-देन पर फोकस
जांच में जुटी टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अपराध से अर्जित धन को बैंकिंग प्रणाली में कैसे प्रवेश कराया गया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि घर, जमीन, वाहन, व्यवसाय और अन्य क्षेत्रों में कहीं बेनामी निवेश तो नहीं किया गया। विभिन्न बैंक खातों और विदेशों में बार-बार हुए वित्तीय लेन-देन की भी जांच हो रही है।
नेपाल पुलिस सोशल मीडिया पर उपलब्ध तस्वीरों और संपर्कों के आधार पर भी ऐसे लोगों का प्रोफाइल तैयार कर रही है,जिनके अभिषेक गिरी से कथित संबंध रहे हैं। इनमें भारत के कुछ हाई- प्रोफाइल व्यक्तियों और आपराधिक छवि वाले कारोबारियों के साथ गिरी की तस्वीरें भी जांच के दायरे में हैं।
-छोटा राजन से पुराने संबंधों की भी पड़ताल
पुलिस सूत्रों का दावा है कि वर्ष 2014 में नेपाल के नुवाकोट जेल में बंद अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन से अभिषेक गिरी की मुलाकात हुई थी। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इसके बाद कॉल बाईपास और फिरौती से जुड़े नेटवर्क में उसकी सक्रियता बढ़ी। बाद में उसे काठमांडू स्थित डिल्ली बाजार जेल भेजा गया था। अभिषेक गिरी के खिलाफ नेपाल में अपहरण फिरौती और संगठित अपराध से जुड़े कई मामले पहले से दर्ज हैं। अब पुलिस उसके पूरे आपराधिक नेटवर्क, आर्थिक स्रोतों और सीमा के दोनों ओर फैले कथित सहयोगियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है।

