
धर्मेंद्र रस्तोगी छपरा,30 जून। सारण के ऐतिहासिक व विश्वप्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल चिरांद स्थित बंगाली बाबा घाट सोमवार को धार्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति और पर्यावरण चेतना का अद्भुत केंद्र बन गया। यहां आयोजित चिरांद चेतना महोत्सव एवं गंगा गरिमा रक्षा संकल्प समारोह में हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता ने पूरे वातावरण को भक्तिमय और उत्सवी बना दिया। गंगा तट पर वैदिक मंत्रोच्चार, भक्ति संगीत, दीपों की दिव्य आभा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने ऐसा आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया कि श्रद्धालु देर तक भाव-विभोर रहे। समारोह का उद्घाटन बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने किया। अपने संबोधन में मंत्री ने चिरांद की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत को राष्ट्रीय एवं वैश्विक पहचान दिलाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि गंगा संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी और सामाजिक जागरूकता से ही संभव है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता गंगा समग्र के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामाशीष जी ने गंगा को भारतीय सभ्यता की जीवनधारा बताते हुए इसके संरक्षण को प्रत्येक नागरिक का नैतिक और सांस्कृतिक दायित्व बताया। उन्होंने गंगा की गरिमा बनाए रखने के लिए जनआंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया। समारोह में परम पूज्य श्रीश्री 1008 देवेन्द्र ब्रह्मचारी जी महाराज (श्री मौनी बाबा), श्री लक्ष्मण किलाधीश महंत तथा श्री मैथिली रमन शरण जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रही। संतों ने अपने प्रवचनों में भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और प्रकृति संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम का सबसे मनोहारी और भावविभोर कर देने वाला दृश्य तब सामने आया, जब काशी से आए 11 बटुकों ने वैदिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच भव्य गंगा महाआरती संपन्न कराई। दीपों की स्वर्णिम आभा, घंटों की अनुगूंज, शंखध्वनि और श्रद्धालुओं के जयघोष से पूरा बंगाली बाबा घाट दिव्यता और आस्था में सराबोर हो उठा। महाआरती के दौरान श्रद्धालुओं ने गंगा मैया की आराधना कर सुख,समृद्धि, राष्ट्र कल्याण और विश्व शांति की कामना की। इसके अतिरिक्त लोकगीत, भजन, सांस्कृतिक झांकियों और संगीतमय प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और अधिक आकर्षक बना दिया। समारोह के समापन पर उपस्थित जनसमूह ने गंगा की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन का सामूहिक संकल्प लिया। चिरांद की ऐतिहासिक धरती पर आयोजित यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि संस्कृति, पर्यावरण और सामाजिक चेतना का एक प्रेरणादायी संदेश बनकर उभरा।

