नई दिल्ली 15 सितंबर (अशोक “अश्क”) महिला एशिया कप हॉकी 2025 के फाइनल में भारत को करारी हार का सामना करना पड़ा। रविवार को खेले गए इस मुकाबले में मेज़बान चीन ने भारत को 4-1 से शिकस्त देकर न सिर्फ खिताब अपने नाम किया, बल्कि अगले साल बेल्जियम और नीदरलैंड में होने वाले महिला हॉकी विश्व कप के लिए डायरेक्ट एंट्री भी पक्की कर ली। वहीं भारतीय टीम को इस हार के साथ दोहरा झटका लगा एक तो एशिया कप जीतने का सपना टूट गया और दूसरा, अब विश्व कप में जगह बनाने के लिए क्वालिफायर खेलने होंगे।

भारत ने फाइनल की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज़ में की। मैच शुरू होने के महज 39वें सेकंड में भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला, जिसे नवनीत कौर ने गोल में तब्दील कर टीम को शुरुआती बढ़त दिला दी। शुरुआती बढ़त के बाद भारतीय खिलाड़ियों में जोश था, लेकिन चीन ने तेज़ी से वापसी की कोशिशें शुरू कर दीं। पहले क्वार्टर में चीन को तीन पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन भारतीय डिफेंस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्हें गोल में बदलने नहीं दिया।
दूसरे क्वार्टर में चीन का दबाव बढ़ता गया और 21वें मिनट में जिशिया यू ने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करके स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इसके बाद चीन के खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ता गया और उन्होंने भारतीय डिफेंस पर लगातार हमले करने शुरू कर दिए। हाफ टाइम तक दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर थीं।
तीसरे क्वार्टर में चीन ने खेल की दिशा ही मोड़ दी। 41वें मिनट में होंग ली ने शानदार फील्ड गोल कर चीन को 2-1 से बढ़त दिला दी। भारतीय टीम ने बराबरी के लिए हरसंभव प्रयास किए लेकिन चीनी डिफेंस ने उन्हें कोई मौका नहीं दिया। चौथे और अंतिम क्वार्टर में चीन ने पूरी तरह से दबदबा बना लिया। 51वें मिनट में मेइरोंग जू ने तीसरा और 53वें मिनट में जियाकी झोंग ने चौथा गोल दागा। इसी के साथ चीन ने तीसरी बार महिला एशिया कप का खिताब अपने नाम कर लिया।
भारत की हार का एक कारण उसकी प्रमुख खिलाड़ियों की अनुपस्थिति भी रही। अनुभवी गोलकीपर सविता और पेनल्टी कॉर्नर विशेषज्ञ दीपिका चोट के कारण टूर्नामेंट नहीं खेल सकीं। इसके अलावा मुमताज खान, लालरेम्सियामी और सुनेलिटा टोप्पो जैसे खिलाड़ी भी फाइनल में उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके।
चीन इससे पहले 1989 में हांगकांग और 2009 में बैंकॉक में एशिया कप जीत चुका है। इस जीत के साथ उसने तीसरा खिताब और विश्व कप की सीधी टिकट हासिल कर ली, जबकि भारत को अब एक बार फिर अपने वर्ल्ड कप सपने को साकार करने के लिए कठिन रास्ते क्वालिफायर से गुजरना होगा।

