नई दिल्ली, 4 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) बॉलीवुड के सबसे प्रतिष्ठित और चहेते कपल्स में से एक, अमिताभ बच्चन और जया बच्चन ने 3 जून 1973 को शादी की थी। यह शादी जितनी सादगी से हुई, उतनी ही निजी भी रही। चकाचौंध भरी फिल्म इंडस्ट्री के इस कपल की शादी में गिने-चुने लोग ही शामिल हुए थे। हाल ही में दिग्गज एक्ट्रेस फरीदा जलाल ने एक इंटरव्यू में इस शादी से जुड़ी कई अनसुनी बातें साझा कीं, जिन्होंने इस जोड़ी के रिश्ते की गहराई और उनकी सादगी को फिर से सामने ला दिया।

फरीदा जलाल ने बताया कि अमिताभ-जया की शादी में फिल्म इंडस्ट्री से केवल दो लोग मौजूद थे वह खुद और मशहूर गीतकार-निर्देशक गुलजार साहब। उन्होंने बताया, “जया मेरी बहुत पुरानी दोस्त हैं, जिन्हें मैं प्यार से जिया बुलाती थी। अमित जी और जया के बीच उस वक्त कोर्टशिप चल रही थी। मैं पाली हिल में रहती थी और अमित जी जुहू में। वो खुद गाड़ी चलाते, जया सामने बैठती और मैं पीछे। मैं कहती मुझे कबाब में हड्डी बनाकर क्यों घुमाते हो?”
फरीदा जलाल ने ये भी बताया कि, “मैं जल्दी सोने वालों में हूं लेकिन अमित जी और जया देर रात कॉल करते, कभी झगड़ा, कभी मनुहार चलती थी। जया रोती थीं, अमित जी उन्हें मनाते थे। वो पल मैंने अपनी आंखों से देखे हैं। वो दोनों बहुत प्यारे हैं।”
इस शादी के इकलौते फिल्मी मेहमान होने का अनुभव साझा करते हुए फरीदा कहती हैं, “उन्होंने सिर्फ मुझे और गुलजार साहब को अपनी शादी में बुलाया था। इंडस्ट्री से कोई और मौजूद नहीं था। यह शादी बेहद निजी रखी गई थी।”
फरीदा जलाल ने न सिर्फ इस कपल की निजी जिंदगी की झलक दिखाई, बल्कि अपने करियर की झलक भी साझा की। उन्होंने 17 साल की उम्र में ‘तकदीर’ फिल्म से अभिनय की शुरुआत की थी। वह यूनाइटेड फिल्म प्रोड्यूसर्स टैलेंट हंट की विजेता रहीं, जिसमें उनके साथ राजेश खन्ना भी विजेता बने थे। उसी वक्त ताराचंद बड़जात्या ने उन्हें फिल्म में गीता का रोल ऑफर किया था।
इसके बाद उन्होंने ‘गोपी’ फिल्म में दिलीप कुमार की बहन का किरदार निभाकर टाइपकास्टिंग की शुरुआत देखी। फिर 90 के दशक में उन्होंने मां के किरदार निभाने शुरू किए और ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘कुछ कुछ होता है’, ‘बिच्छू’ जैसी फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं।
टीवी की दुनिया में ‘देख भाई देख’ और ‘बालिका वधू’ में उन्होंने अपनी खास छाप छोड़ी। हाल ही में उन्हें संजय लीला भंसाली की ‘हीरामंडी: द डायमंड बाजार’ में कुदसिया बेगम के रोल में देखा गया।
फरीदा जलाल की यह दिलचस्प कहानी सिर्फ एक शादी की नहीं, बल्कि उस दौर की मासूमियत, दोस्ती और सादगी की भी मिसाल है।

