नई दिल्ली, 3 सितम्बर (अशोक “अश्क”) जीएसटी काउंसिल की बहुप्रतीक्षित बैठक बुधवार से शुरू हो रही है, जिसमें जीएसटी के स्लैब में कमी और टैक्स दरों को सरल बनाने पर अहम निर्णय लिए जा सकते हैं। इससे पहले मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि सरकार जीएसटी में “अगली पीढ़ी के सुधारों” की योजना बना रही है, जिससे अर्थव्यवस्था को अधिक पारदर्शी और खुला बनाया जा सकेगा।

चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने नियमों को सरल बनाने के लिए एक टास्कफोर्स गठित किया है। इसके अंतर्गत जीएसटी का रजिस्ट्रेशन और रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया भी आसान की जाएगी।
संभावित बदलाव: खाद्य और वस्त्र उत्पादों पर एक समान 5% जीएसटी लगाने का प्रस्ताव है।
फ्रिज, बड़े टीवी और एसी जैसे उत्पादों को 18% स्लैब में बनाए रखते हुए दरों में कमी की संभावना है।
शराब और लग्जरी कारों पर 40% टैक्स के साथ सेस हटाया जा सकता है।
इन बदलावों से ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से टैक्स रेट में संशोधन की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती है राज्यों को साथ लाना है। जीएसटी काउंसिल में राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों (दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी) के मंत्री शामिल हैं। विपक्ष शासित राज्य राजस्व हानि के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार का कहना है कि शुरुआती घाटा हो सकता है, लेकिन उपभोग बढ़ने से टैक्स कलेक्शन सामान्य हो जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय दबाव भी एक कारण है। अमेरिका द्वारा भारत के कई उत्पादों पर 50% तक का आयात शुल्क लगाने से निर्यात पर असर पड़ा है। ऐसे में घरेलू मांग बढ़ाना जरूरी है।
सीतारमण ने बैंकों से एमएसएमई, इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप सेक्टर को फंड देने की अपील की और कहा कि विश्वास, तकनीक और पारदर्शिता ही इन सुधारों के मुख्य स्तंभ होंगे।

