
पटना (अशोक “अश्क”) बिहार में औद्योगिक विकास को गति देने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बड़ा ऐलान किया है। स्वतंत्रता दिवस पर गांधी मैदान से की गई घोषणा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने शनिवार को सोशल मीडिया के माध्यम से “स्पेशल इंडस्ट्रियल पैकेज” की विस्तृत जानकारी साझा की। इस पैकेज के तहत बिहार में नया उद्योग लगाने वाले उद्यमियों को अगले 6 महीने तक कई विशेष सुविधाएं दी जाएंगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह पहल राज्य के आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि राज्य के अधिक से अधिक युवा आत्मनिर्भर बनें और बिहार को औद्योगिक नक्शे पर प्रमुख स्थान दिलाएं।
कैपिटल सब्सिडी और ब्याज में छूट नए उद्योग लगाने वाले उद्यमियों को पूंजी पर मिलने वाली सब्सिडी और बैंक लोन के ब्याज पर सब्सिडी दोगुनी कर दी जाएगी। इससे उन्हें निवेश में काफी राहत मिलेगी।
जीएसटी प्रोत्साहन उद्योग स्थापित करने वाले उद्यमियों को जीएसटी के रूप में दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि भी दोगुनी की जाएगी, जिससे उनके संचालन लागत में भारी कमी आएगी।
जमीन की सुविधा सभी जिलों में उद्योग लगाने के लिए सरकार भूमि उपलब्ध कराएगी। विशेषकर ऐसे उद्योग जो अधिक रोजगार सृजन करेंगे, उन्हें मुफ्त में जमीन दी जाएगी।
विवाद मुक्त भूमि आवंटन उद्योग स्थापित करने के लिए आवंटित जमीन से संबंधित सभी विवादों को सुलझाने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि उद्यमी निर्बाध रूप से अपना कार्य शुरू कर सकें।
6 महीने की विशेष छूट अवधि यह संपूर्ण पैकेज अगले 6 महीने में उद्योग लगाने वाले उद्यमियों को ही मिलेगा, यानी यह एक सीमित अवधि का अवसर है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पोस्ट में यह भी बताया कि सात निश्चय 2 के तहत 2020 में किए गए वादे के अनुसार अब तक 50 लाख युवाओं को रोजगार और सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई जा चुकी है। अगले 5 वर्षों में 1 करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विशेष पैकेज से राज्य में औद्योगिक माहौल को बढ़ावा मिलेगा और युवा वर्ग स्वरोजगार की ओर प्रेरित होगा। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि इस योजना से संबंधित विस्तृत अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी, जिसमें सभी नियमों और पात्रता की पूरी जानकारी दी जाएगी। नीतीश सरकार के इस कदम को राज्य में मेक इन बिहार अभियान को मजबूती देने वाला बताया जा रहा है। यह पहल न केवल रोजगार सृजन में मदद करेगी, बल्कि बिहार को उद्योग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।

