नई दिल्ली, 23 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) भारतीय वायुसेना एक ऐसे ऐतिहासिक कदम की तैयारी में है, जो आने वाले दशकों तक देश की सुरक्षा नीति की दिशा तय करेगा। लगभग ₹1.66 लाख करोड़ रुपये की लागत वाला मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) प्रोजेक्ट न केवल वायुसेना की क्षमता को नई ऊंचाई देगा, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल को वैश्विक पहचान भी दिलाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत 114 नए जेट्स खरीदे जाएंगे, जिससे वायुसेना की स्क्वॉड्रन संख्या 31 से बढ़कर 42 हो जाएगी। इससे भारत चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर प्रभावी जवाब देने में सक्षम होगा।

MRFA प्रोजेक्ट विशेष रूप से ‘टू-फ्रंट वॉर’ यानी दो दिशाओं से संभावित युद्ध की स्थिति को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। आने वाले विमान 4.5 जनरेशन की तकनीक से लैस होंगे, जो हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के मिशनों को अंजाम देने में सक्षम होंगे। ये जेट्स न केवल दुश्मन के फाइटर विमानों को हवा में ही नष्ट कर सकते हैं, बल्कि सटीक ग्राउंड स्ट्राइक और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसी क्षमताओं में भी निपुण होंगे। पुराने MiG-21 और Jaguar विमानों की जगह लेने वाले ये जेट्स भविष्य की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करेंगे।
सरकार ने इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह ‘मेक इन इंडिया’ पहल से जोड़ने का निर्णय लिया है। अधिकांश जेट्स का निर्माण भारत में ही होगा, जिसमें हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और निजी रक्षा कंपनियां मिलकर काम करेंगी। इन विमानों को भारतीय मिसाइल सिस्टम जैसे अस्त्र और ब्रह्मोस से लैस किया जाएगा। इससे न केवल बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा, बल्कि विदेशी तकनीक का हस्तांतरण (Technology Transfer) भी संभव होगा।
MRFA प्रोजेक्ट भारत को एक ‘खरीदार राष्ट्र’ से ‘निर्माता राष्ट्र’ में बदलने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। भारतीय वायुसेना ने 114 विमानों की खरीद के लिए सात प्रमुख वैश्विक कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया है, फ्रांस का रफाल F4, अमेरिका के F/A-18 ब्लॉक III और F-21, स्वीडन का ग्रिपेन E, यूरोप का यूरोफाइटर टाइफून, तथा रूस के मिग-35 और सुखोई Su-35। प्रत्येक विमान अपनी विशिष्ट तकनीकी ताकतों के लिए प्रसिद्ध है। रक्षा मंत्रालय अगले 12 से 18 महीनों में तकनीकी मूल्यांकन पूरा करेगा, जिसके बाद फाइनल चयन किया जाएगा।

