नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (अशोक “अश्क”) भारत के केले अब रूस के बाजारों में और अधिक स्थान बना सकते हैं। रूस की फाइटोसैनिटरी निगरानी संस्था ने संकेत दिए हैं कि वह भारत से हर साल 3 से 5 लाख मीट्रिक टन केले आयात करने को तैयार है। यह जानकारी संस्था के प्रमुख सर्गेई डंकवर्ट ने भारत के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान दी।

डंकवर्ट ने बताया कि रूस भारतीय कृषि उत्पादों, खासतौर पर केलों की आपूर्ति में बड़ी संभावनाएं देखता है। साथ ही, दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने झींगा, मछली उत्पाद, और अन्य फल-सब्जियों की आपूर्ति को लेकर भी चर्चा की।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा केला उत्पादक देश है, जहां हर साल लगभग 3.3 करोड़ टन केले का उत्पादन होता है। इसके बावजूद, भारत का केला निर्यात अभी भी सीमित देशों तक ही पहुंचता है। रूस जैसे बड़े बाजार का खुलना भारतीय किसानों और निर्यातकों के लिए आर्थिक अवसरों का नया द्वार खोल सकता है।
यह पहल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की उस रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें उन्होंने भारत-रूस व्यापार संतुलन को बेहतर बनाने के निर्देश दिए हैं। पुतिन आगामी दिसंबर में नई दिल्ली की यात्रा करने वाले हैं और इसके पहले व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह प्रस्ताव अमल में आता है, तो भारत को नई वैश्विक बाजार हिस्सेदारी मिलेगी और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव होगी। साथ ही, भारत-रूस कृषि व्यापार सहयोग में नई गति आएगी, जिससे द्विपक्षीय संबंध और गहरे होंगे।

