
बक्सर, 31 जनवरी (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के अंतर्गत संचालित प्रतिष्ठित बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया, जब डॉ. रूबी रानी ने सह अधिष्ठाता सह प्राचार्य के पद का विधिवत पदभार ग्रहण किया। इसके साथ ही वह देश के सबसे पुराने कृषि महाविद्यालयों में शामिल इस संस्थान की पहली महिला प्राचार्य बन गई हैं। यह क्षण न केवल संस्थान, बल्कि बिहार और देश की कृषि शिक्षा व्यवस्था के लिए भी गर्व का विषय माना जा रहा है।

वर्ष 1905 में स्थापित बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर ने भारतीय कृषि शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। ऐसे ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित संस्थान की बागडोर पहली बार किसी महिला शिक्षाविद् को सौंपा जाना महिला नेतृत्व और सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।डॉ. रूबी रानी एक अनुभवी शिक्षाविद्, कुशल प्रशासक और समर्पित कृषि वैज्ञानिक के रूप में जानी जाती हैं। उन्हें कृषि शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार कार्यों में कई वर्षों का समृद्ध अनुभव प्राप्त है। अपने अब तक के कार्यकाल में उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, छात्र हित, नवाचार आधारित अनुसंधान और किसानों तक तकनीक पहुंचाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। पदभार ग्रहण के बाद अपने संबोधन में डॉ. रूबी रानी ने कहा कि बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाना उनकी पहली जिम्मेदारी होगी।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक, रोजगारोन्मुखी और नवाचार आधारित शिक्षा देना, अनुसंधान को किसानों की जमीनी समस्याओं से जोड़ना और संस्थान को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना उनका लक्ष्य है।महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि पहली महिला प्राचार्य के रूप में मिली यह जिम्मेदारी उन्हें और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देती है। इस अवसर पर बिहार कृषि विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, शिक्षक-कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और उनके नेतृत्व में महाविद्यालय के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद जताई।डॉ. रूबी रानी का पदभार ग्रहण करना बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है।

