
पूर्णिया:-14 अप्रैल(राजेश कुमार झा)जिले में पिछले पांच सालों में तकरीबन 7 बड़ी बिल्डिंग और जिला समाहरणालय के अंदर भी कई कंस्ट्रक्शन एवं रेनोवेट का काम हुआ.नया-नया था तो काम बहुत ही अच्छा दिखा. लेकिन जैसे-जैसे पुराना होता गया तो भवन निर्माण व्यवस्था भाग की भी सच्चाई दिखने लगी.इस मामले को लेकर बिफोरप्रिंट डिजिटल ने जब सभी बिल्डिंग सहित जिला समाहरणालय में हुए रेनोवेट का काम का सर्वे किया तो कई बड़े सवाल खड़े होने लगे.हालांकि जिले के कोई भी छोटे से बड़े अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे है.लेकिन बिल्डिंग और रेनोवेशन का काम देखने के बाद तो आप खुद ब खुद सच्चाई देख सकते है.बताते चलें कि भवन निर्माण विभाग जब किसी भी बिल्डिंग या रेनोवेशन के काम के लिए टेंडर लाती है तो विभाग के लिस्टेड संवेदक में काम को लेकर होड़ मच जाती है.यहां तक कि काम लेने के चक्कर में 15 से 25 प्रतिशत तक कम दर यानि विलो रेट पर कम ले लेते है.जैसे मान लीजिए भवन निर्माण विभाग ने किसी बिल्डिंग या रेनोवेशन के काम के लिए एक करोड़ का टेंडर जारी किया.अब उस काम को लेने के लिए संवेदक 15 से 25 प्रतिशत कम दर यानि विलो रेट पर काम लेता है तो वो एक करोड़ के कम की कीमत 85 से 75 लाख हो जाती है.उसके बाद विभाग के अधिकारियों के मान-सम्मान में 15 प्रतिशत चला जाता है.उसके बाद संवेदक का बचत भी 15 प्रतिशत.इस तरह एक करोड़ का काम घट कर 55 लाख में पहुंच जाता है.इस तरह कोई भी काम जो एक करोड़ में होना था.वो अब मात्र 55 लाख में होना है तो आप काम की क्वालिटी की उम्मीद किनसे कर कैसे करें.इसके चलते भवन निर्माण विभाग की तरफ से जिले में चल रहे सभी कामों उच्च स्तरीय जांच हो और संवेदक सहित विभागीय अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो.

