
पूर्णिया:-15 जून(राजेश कुमार झा)आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री-सह-प्रभारी मंत्री पूर्णिया जिला रत्नेश सादा की अध्यक्षता में सोमवार को पूर्णिया जिले में संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ पूर्व तैयारियों को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन महानंदा सभागार पूर्णिया में आहूत की गई।
प्रभारी मंत्री द्वारा संभावित बाढ़ के दौरान सभी स्तरों पर बेहतर तैयारी एवं तटबंधों पर विशेष निगरानी को लेकर दिये कई महत्वपूर्ण निर्देश:-
मंत्री द्वारा 5 मृतकों के आश्रितों को 20 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान हस्तगत कराया गया.
संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ से निपटने के लिए पूर्णिया जिले की पूर्व तैयारियों की सोमवार को उच्च स्तरीय विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई.
यह बैठक बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री-सह-प्रभारी मंत्री पूर्णिया जिला रत्नेश सादा की अध्यक्षता में संपन्न हुई.
इस महत्वपूर्ण बैठक में मंत्री भवन निर्माण विभाग लेशी सिंह,सांसद (पूर्णिया),सभी विधायकगण,जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार एवं पुलिस अधीक्षक स्वीटी सहरावत भा०पु०से० तथा सभी जिला स्तरीय पदाधिकारी,अनुमंडल पदाधिकारी और डीसीएलआर उपस्थित थे.
बैठक में “आपदा नहीं हो भारी,अगर हो पूर्व तैयारी” के मूल मंत्र के साथ सभी विभागों को अलर्ट मोड पर कार्य करने का निर्देश दिया गया.
बैठक के दौरान मंत्री जी द्वारा जिले की तैयारियों की बिंदुवार समीक्षा की गई.
बैठक से पूर्व एक अत्यंत संवेदनशील पहल करते हुए विभिन्न आपदा में अपनी जान गंवाने वाले 5 मृतकों के आश्रितों को राहत प्रदान करने हेतु अनुग्रह अनुदान के रूप में कुल 20 लाख रुपये के चेक हस्तगत कराया गया.
समीक्षा के दौरान मंत्री जी को पीपीटी के माध्यम से अवगत कराया गया कि पूर्णिया जिला में अवस्थित सभी 07 तटबंधों का संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी एवं कार्यपालक अभियंता द्वारा संयुक्त रूप से निरीक्षण किया गया है तथा आवश्यक मरम्मति कार्य पूर्ण कर लिया गया है.
मंत्री जी द्वारा तटबंधों पर हो रहे कार्यों के अनुश्रवण हेतु निगरानी रखने का निर्देश दिया गया.
इस वर्ष बाढ़ एवं कटाव से गाँवों को सुरक्षित रखने के लिए कुल 13 स्थलों (अंचल अमौर में 05, बैसा में 02 और बायसी में 06) पर बाढ़ निरोधात्मक कार्य (Anti-Erosion Work) कराया जा रहा है.
कार्य की गुणवत्ता हेतु फ्लड कंट्रोल डिविजन के कार्यों का अनुश्रवण करने हेतु सभी अनुमंडल पदाधिकारी को निदेशित किया गया.
बाढ़ अवधि में ‘फ्लड फाइटिंग’ हेतु आवश्यक बोरे, लोहे का जाल,बालू-गिट्टी एवं बोल्डर की पर्याप्त व्यवस्था कर ली गई है.आक्राम्य स्थलों पर विशेष सतर्कता बरतने हेतु अभियंताओं की प्रतिनियुक्ति की जाएगी.
जिले में 29 सरकारी नाव, 80 निजी नावों की व्यवस्था की गई है.सूखा राशन (चावल,दाल,आलू,नमक, चूड़ा,चीनी आदि) की पैकेजिंग हेतु 14 केंद्र (प्रखंड मुख्यालय) चिन्हित किए गए हैं.जिले में पर्याप्त मात्रा में पॉलीथीन शीट्स उपलब्ध हैं.
बाढ़ पीड़ितों के लिए 344 बाढ़ आश्रय स्थल तथा 291 सामुदायिक रसोई केंद्रों को चिन्हित किया गया है.
बाढ़ अवधि के लिए 18 चलंत,45 स्थायी और 40 अस्थायी (कुल 103) मेडिकल टीमों का गठन किया गया है.सभी स्वास्थ्य केंद्रों में 07 प्रकार की आवश्यक दवाएं (ASVS, ARV, ORS आदि) पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं.
जिले में 2783 पुराने चापाकलों की मरम्मति का लक्ष्य शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है.बाढ़ आश्रय स्थलों पर 120 चापाकल और 280 शौचालय निर्माण की तैयारी कर ली गई है.सुदूर क्षेत्रों के लिए 02 जलदूत (500 लीटर क्षमता) उपलब्ध हैं.
पशुओं के लिए 1950 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सूखा चारा निर्धारित किया गया और 42 प्रकार की पशु दवाएं भंडार में उपलब्ध हैं.
बाढ़ प्रवण क्षेत्रों में पशुओं हेतु 42 ऊँचे शरण स्थल भी चिन्हित कर लिए गए हैं.
संभावित सुखाड़ एवं बाढ़ के लिए आकस्मिक फसल योजना तैयार कर ली गई है. मार्च-अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश/आँधी से फसल क्षति कृषि इनपुट अनुदान DBT के माध्यम से किसानों को भेजने की कार्रवाई की जा रही है.
SDRF के माध्यम से 500 आपदा मित्रों तथा 1400 स्कूली बच्चों को सुरक्षित तैराकी और बाढ़ बचाव का प्रशिक्षण दिया गया है.
हीट वेव से निपटने के लिए अस्पतालों में 48 AC युक्त बेड सुरक्षित किए गए हैं तथा नगर निकाय क्षेत्रों में 107 सार्वजनिक स्थलों पर प्याऊ की व्यवस्था की गई है.
बैठक के अंत में, माननीय प्रभारी मंत्री जी ने सभी विभागों को आपसी समन्वय स्थापित कर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 24×7 तत्पर रहने का निर्देश दिया।

