
धर्मेंद्र रस्तोगी छपरा,30 जून। सारण जिले के शिक्षा विभाग में कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का एक बड़ा मामला सामने आया है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी माध्यमिक शिक्षा से जुड़े रिश्वत और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने विभागीय पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों की मानें तो वेंडर से कथित तौर पर 12.50 लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोपों की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। जांच समिति का नेतृत्व डीडीसी लक्ष्मण तिवारी कर रहे थे।
-32 महीने की नौकरी,लेकिन खातों में करोड़ों की लेन-देन
जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि डीपीओ माध्यमिक अजीत कुमार हरिजन की वैध आय और उनके परिवार के वित्तीय लेन-देन में बड़ा अंतर पाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2023 से अप्रैल 2026 तक करीब 32 महीनों में उनका अनुमानित वेतन लगभग 27.43 लाख रुपये रहा,जबकि इसी अवधि में डीपीओ और उनकी पत्नी के बैंक खातों में 2 करोड़ 51 लाख 06 हजार 562 रुपये का लेन-देन दर्ज किया गया। जांच समिति ने इसे आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक बताते हुए आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का संभावित मामला माना है।
-पत्नी के नाम जमीन, करोड़ों का निर्माण और बढ़ी जांच की दिशा
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि डीपीओ की पत्नी पूजा कुमारी के नाम पर लगभग 41.50 लाख रुपये मूल्य की छह बीघा नौ कट्ठा आठ धूर जमीन खरीदी गई है। इसके अतिरिक्त करोड़ों रुपये की लागत से मकान निर्माण की जानकारी भी जांच टीम के सामने आई है।
-समिति ने की पूरे परिवार के संपति के जांच की अनुशंसा
डीपीओ,उनकी पत्नी व परिवार के अन्य सदस्यों के बैंक खातों तथा संपत्तियों की विस्तृत जांच कराई जाने की समिति ने अनुशंसा की है।
-रिश्वत का नेटवर्क परिवार और करीबी लोगों तक पहुंची रकम
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यह बताया गया कि कथित रिश्वत की रकम सीधे अधिकारी तक सीमित नहीं रही। जांच में आरोप लगाया गया कि वेंडर द्वारा उनकी पत्नी,भाई,साले,भतीजी और तत्कालीन चालक के खातों में भी डिजिटल माध्यम से राशि भेजी गई। जिन खातों में लेन-देन का उल्लेख किया गया है उनमें पत्नी पूजा कुमारी,भाई गुड्डू हरिजन, साले रविकांत राम,भतीजी काजल कुमारी और तत्कालीन चालक योगेन्द्र मांझी शामिल बताए गए हैं।
जांच टीम ने इन लेन-देन को संदेहास्पद वित्तीय गतिविधियों की श्रेणी में रखते हुए विस्तृत जांच की अनुशंसा की गई है।
-शिकायत से शुरू हुआ मामला,संवेदक ने लगाए गंभीर आरोप
उक्त मामले की शुरुआत शिक्षा विभाग से जुड़े संवेदक रवि कुमार राम की शिकायत से हुई। शिकायत के अनुसार विभागीय कार्य दिलाने के नाम पर कथित तौर पर 12.50 लाख रुपये की मांग की गई।
आरोप है कि तीन किस्तों में 10.70 लाख रुपये नकद और लगभग 1.03 लाख रुपये डिजिटल माध्यम से विभिन्न खातों में भेजे गए। शिकायतकर्ता का यह भी दावा है कि बाद में केवल 1.53 लाख रुपये लौटाए गए,जबकि शेष राशि वापस नहीं की गई और काम से वंचित करने की धमकी दी गई।
-आचार नियमावली उल्लंघन की आशंका
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के प्रावधानों के अनुसार कोई सरकारी कर्मचारी बिना अनुमति परिवार के माध्यम से आर्थिक लाभ स्वीकार नहीं कर सकता। ऐसे में परिजनों के खातों में कथित रूप से राशि पहुंचना जांच का विषय माना गया है। जिला लोक शिकायत निवारण कोषांग ने भी अपने आदेश में डीपीओ को नियम उल्लंघन का दोषी माना था। साथ ही शिकायतकर्ता के विरुद्ध भी रिश्वत देने के आरोप में विधिसम्मत कार्रवाई की बात कही गई।
-आगे बढ़ी कार्रवाई
जांच समिति ने बैंक खातों, चल-अचल संपत्तियों और संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत जांच कराने की अनुशंसा की है। इसके लिए अवर निबंधन पदाधिकारी सहित संबंधित एजेंसियों की भूमिका तय किए जाने की बात कही गई है। अब पूरे मामले में अगली कार्रवाई पर नजरें डीएम और राज्य स्तर के शिक्षा प्रशासन पर टिकी हैं। यदि विभागीय कार्रवाई,निगरानी जांच या आर्थिक अपराध इकाई स्तर की जांच आगे बढ़ती है,तो यह मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली से जुड़े बड़े सवाल भी सामने आ सकते हैं।

