नई दिल्ली, 15 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) भारतीय मूल के प्रतिष्ठित रणनीतिकार और विदेश नीति विशेषज्ञ एशले टेलिस की अमेरिका में गिरफ्तारी ने कूटनीतिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। एफबीआई ने टेलिस को कथित तौर पर “राष्ट्रीय रक्षा जानकारी” (National Defense Information) को अवैध रूप से अपने पास रखने के आरोप में गिरफ्तार किया है। टेलिस पर आरोप है कि उन्होंने ‘टॉप सीक्रेट’ और ‘सीक्रेट’ दर्जे के सैकड़ों पन्नों वाले दस्तावेज अपने घर में जमा कर रखे थे।

वर्तमान में टेलिस कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में सीनियर फेलो हैं और एशिया संबंधी सामरिक मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं। एफबीआई की शिकायत के अनुसार, उन्होंने अमेरिका के रक्षा और विदेश विभागों से संवेदनशील दस्तावेज़ प्रिंट कर घर ले जाने का प्रयास किया। उन्हें सुरक्षा कैमरों में इन कक्षा-युक्त दस्तावेज़ों को लेदर ब्रिफकेस में रखते हुए देखा गया।
अमेरिकी न्यायालय ने उन्हें हिरासत में रखने का आदेश दिया है और अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को तय की गई है। यदि आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो टेलिस को अधिकतम 10 वर्षों की सजा और 2.5 लाख डॉलर तक जुर्माना हो सकता है।
एशले टेलिस की गिरफ्तारी के बाद भारत में भी सियासी घमासान शुरू हो गया है। भाजपा ने उन्हें लंबे समय से भारत विरोधी एजेंडे का समर्थक बताया है। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि टेलिस हमेशा मोदी सरकार के खिलाफ बयानबाज़ी करते थे।
वहीं, शिवसेना (उद्धव गुट) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने टेलिस पर तीखा हमला करते हुए उन्हें ‘बिकाऊ’ बताया। उन्होंने कहा कि टेलिस न तो भारत के विशेषज्ञ हैं और न ही दक्षिण एशिया की राजनीति को समझते हैं — वे केवल विदेशी हितों की पूर्ति करते रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरफ्तारी ट्रम्प प्रशासन के राजनीतिक विरोधियों पर दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है। अमेरिकी विदेश नीति हलकों और रणनीतिक समुदाय में यह मामला चौंकाने वाला माना जा रहा है।
टेलिस की गिरफ्तारी ने न केवल उनकी विशेषज्ञता को कठघरे में खड़ा किया है, बल्कि अमेरिका-भारत रणनीतिक संबंधों पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब सबकी निगाहें 21 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी हैं।

