
पटना (अशोक “अश्क”) बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मी के बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की वोट अधिकार यात्रा ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। 16 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा की शुरुआत सासाराम से हो रही है और इसका समापन 1 सितंबर को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में एक विशाल रैली के साथ होगा। इस यात्रा का उद्देश्य निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज़ उठाना और वोट चोरी के मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाना है। इस यात्रा को राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे, जबकि तेजस्वी यादव इस यात्रा में राहुल गांधी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या राहुल गांधी की यह यात्रा बिहार की राजनीति में निर्णायक मोड़ ला सकेगी या यह सिर्फ एक राजनीतिक प्रतीक बनकर रह जाएगी। राहुल गांधी की यह यात्रा बिहार के 25 जिलों से गुजरेगी, जिसमें कांग्रेस और महागठबंधन के कार्यकर्ता आम जनता को मताधिकार के प्रति जागरूक करेंगे। यात्रा के दौरान सभाएं, रथ यात्राएं, नुक्कड़ नाटक और जनसंवाद के कार्यक्रम होंगे। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, यह यात्रा लोकतंत्र की रक्षा के लिए है और इसे सड़कों पर लड़ा जाएगा। कांग्रेस ने इसके साथ 14 अगस्त को लोकतंत्र बचाओ मशाल मार्च और 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक 5 करोड़ हस्ताक्षर अभियान की भी शुरुआत की है। तेजस्वी यादव की इस यात्रा में सक्रिय भूमिका इसे और अधिक प्रभावशाली बना सकती है। उन्होंने इस अभियान के लिए एक विशेष गीत भी लॉन्च किया है और बिहारवासियों से इसमें भाग लेने की अपील की है। आरजेडी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से लिखा, भाजपा के इशारे पर चुनाव आयोग बिहार के लोगों के वोट के अधिकार से खिलवाड़ कर रहा है, जिसके खिलाफ राहुल गांधी और तेजस्वी यादव मिलकर आवाज़ उठाएंगे। राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग, बीजेपी के दबाव में, बिहार में करीब 65 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा रहा है। उनका कहना है कि यह कार्रवाई खासकर गरीब, दलित और विपक्षी दलों के समर्थकों को वोट देने से वंचित करने के लिए की जा रही है। हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए राहुल गांधी से इस संबंध में शपथपत्र मांगा, जिसे उन्होंने देने से इनकार कर दिया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह यात्रा महागठबंधन को कई मोर्चों पर मजबूत कर सकती है। तेजस्वी यादव की बिहार में पकड़ और राहुल गांधी की राष्ट्रीय पहचान मिलकर युवा, पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वोटर्स को प्रभावित कर सकते हैं। यह वर्ग पारंपरिक रूप से महागठबंधन का वोट बैंक रहा है। साथ ही यह यात्रा कार्यकर्ताओं के मनोबल को भी नई ऊर्जा दे सकती है। पूर्व बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने इसे ऐतिहासिक यात्रा बताते हुए कहा कि यह यात्रा बिहार की राजनीति में नई दिशा तय करेगी और महागठबंधन को मजबूती देगी। इधर बीजेपी ने इस यात्रा को राजनीतिक नौटंकी करार दिया है और कहा है कि इससे आम जनता पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। चुनाव आयोग ने भी राहुल गांधी के आरोपों को नकारते हुए इसे बेबुनियाद बताया है। इसके अलावा, यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है। यदि महागठबंधन इस मुद्दे को जन-जन तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंचा पाया, तो यह यात्रा केवल एक प्रतीकात्मक राजनीतिक कदम बनकर रह सकती है। राहुल गांधी की वोट अधिकार यात्रा बिहार में मतदाता जागरूकता और विपक्षी एकजुटता की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकती है। तेजस्वी यादव की सक्रिय भागीदारी इसे और अधिक जनभावनाओं से जोड़ सकती है। हालांकि, इसका असली असर जनता की भागीदारी, मीडिया कवरेज और रणनीतिक अभियानों पर निर्भर करेगा। यदि महागठबंधन इस मुद्दे को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत कर सका, तो यह यात्रा 2025 के चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। फिलहाल, बिहार की राजनीति में यह यात्रा एक नया अध्याय लिखती दिख रही है।

