पटना, 16 दिसम्बर (पटना डेस्क) बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर एक बार फिर सियासी सुर्खियों में हैं। दिल्ली दौरे से लौटने से पहले उन्होंने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से बंद कमरे में लंबी बातचीत की।

यह बैठक करीब दो घंटे चली, जिसने बिहार से लेकर उत्तर प्रदेश तक की राजनीति में नई अटकलों को हवा दे दी है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मुलाकात में बिहार और देश में विपक्ष की राजनीति, संगठन की कमजोरी, चुनावी रणनीति और भविष्य के संभावित कदमों पर विस्तार से चर्चा हुई। हालांकि, इसे फिलहाल एक प्रारंभिक बातचीत बताया जा रहा है, लेकिन संकेत साफ हैं कि आने वाले दिनों में ऐसी बैठकों का सिलसिला आगे बढ़ सकता है। बताया जा रहा है कि बातचीत के एजेंडे में बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की राजनीति प्रमुख रूप से शामिल रही।दिलचस्प बात यह है कि दोनों पक्षों ने इस मुलाकात को सार्वजनिक तौर पर ज्यादा महत्व नहीं दिया। संसद परिसर के बाहर जब मीडिया ने प्रियंका गांधी से इस बैठक को लेकर सवाल किया तो उन्होंने हल्के अंदाज में कहा, “यह कोई न्यूज है?” लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस बयान को भी रणनीतिक चुप्पी के तौर पर देखा जा रहा है।इस मुलाकात के बाद यूपी और बिहार के तीन बड़े कांग्रेस नेताओं के बयानों ने सियासी हलचल और तेज कर दी है। अंदरखाने चर्चा है कि बिहार चुनाव की समीक्षा बैठक में राहुल गांधी ने प्रदेश नेतृत्व को नए सिरे से संगठन मजबूत करने और आक्रामक तैयारी के निर्देश दिए हैं।वहीं, 3 दिसंबर को हुई उत्तर प्रदेश कांग्रेस नेताओं की बैठक में राहुल गांधी ने साफ कहा कि अब कांग्रेस किसी भी राज्य में बैकफुट पर नहीं, बल्कि फ्रंटफुट पर चुनाव लड़ेगी। जरूरत पड़ी तो गठबंधन तोड़ने जैसे कठोर फैसले लेने से भी पीछे नहीं हटेगी। इसका साफ संकेत है कि कांग्रेस यूपी-बिहार में नई राजनीतिक जमीन तैयार करना चाहती है।राहुल गांधी की इस बैठक के बाद यूपी कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडेय ने घोषणा की कि 2026 के पंचायत चुनाव में कांग्रेस समाजवादी पार्टी से गठबंधन नहीं करेगी। अगले ही दिन प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी दो टूक कहा कि पार्टी पंचायत से लेकर विधानसभा चुनाव तक अकेले लड़ने की तैयारी कर रही है।प्रशांत किशोर से संभावित बातचीत पर बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू ने कहा कि समीक्षा बैठकों के बाद पार्टी सभी विकल्पों पर विचार कर रही है और जल्द ही आगे की रणनीति तय की जाएगी। सियासी संकेत साफ हैं—कांग्रेस अब बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है।

