
पूर्णिया:-06 जून(राजेश कुमार झा)शहर की कई ऐसे इलाके है,जिनकी तंग और सकरी गलियों में खुलेआम धड़ल्ले से बिना सेफ्टी के वर्षों से अस्पताल चलाए जा रहे है. न कोई सुनने वाला और न कोई देखने वाला.जब कोई बड़ी दुर्घटना हो जाएगी तो उसके बाद जागेंगे जिला प्रशासन और सिविल सर्जन. बताते चलें कि शहर के तंग गलियों में कई ऐसे अस्पताल और मॉल चलाये जा रहे है.जो न तो नगर निगम के कोई नियम को फॉलो कर रहे है और न तो किसी सेफ्टी फीचर को ही ध्यान में रखे है.जहां अगर किसी भी तरह की कोई दुर्घटना हो जाए तो बचने का कोई सवाल ही नहीं है.अब सवाल ये उठता है कि इन अस्पतालों को निर्माण के लिए नगर निगम ने नक्शा कैसे पास कर दिया.सिविल सर्जन ने कैसे इन अस्पतालों को बिना सेफ्टी फीचर के लाइसेंस दे दिए.अगर भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी.बताते चलें कि मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में हुए दुर्घटना से हुई मौतों के बाद पूरे बिहार के सभी अस्पतालों की जांच शुरू हो चुकी है.लेकिन सवाल ये उठता है कि जिला प्रशासन,नगर निगम और सिविल सर्जन दुर्घटना होने का इंतजार क्यों कर रहे है. बताते चलें कि तंग गलियों में बने सभी अस्पताल और मॉल कागजी तौर पर फिट बताए जा रहे है.लेकिन जब उन अस्पतालों और मॉल को जाकर देखेंगे तो समझ में आयेगा कि सच क्या है.बताते चलें कि शहर के सबसे व्यस्ततम मेडिकल हब कहे जाने वाले इलाके लाइन बाजार में कई ऐसे बहुमंजली इमारतें है.जहां अस्पताल, नर्सिंग होम,मेडिकल दुकान सहित कई ऐसे दर्जनों प्रतिष्ठान चलाए जा रहे है. जहां सेफ्टी फीचर तो है, लेकिन सब दिखावे के लिए. एक भी ऐसी बहुमंजली इमारतें नहीं है.जो नगर निगम के नक्शे के अनुसार बनाया गया हो.गौरतलब है कि लाइन बाजार में ऐसे दर्जनों अस्पताल,मार्केट और मॉल है.जहां अगर कोई बड़ी दुर्घटना हो जाए तो फायर बिग्रेड और एम्बुलेंस तक को पहुंचने में भारी मशक्कत उठानी पड़ेगी.दूसरी सबसे बड़ी बात अभी भी लाइन बाजार में कई ऐसे बड़े बहुमंजली इमारतों,अस्पताल और मॉल का निर्माण हो रहा,जो नगर निगम से नक़्शे तो पास है,लेकिन निर्माण की हकीकत कुछ और ही है.

