नेताजी को अंग्रेजों से डरकर भागा बताने पर बवाल, केरल सरकार ने दी सफाई, SCERT सदस्य पर लगेगा प्रतिबंध

तिरुवनंतपुरम (अशोक “अश्क”) केरल में कक्षा 4 की किताब के ड्राफ्ट में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लेकर की गई बड़ी गलती ने सियासी और सामाजिक गलियारों में विवाद खड़ा कर दिया है। शिक्षक पुस्तिका के मसौदे में यह लिखा गया था कि नेताजी अंग्रेजों से डरकर जर्मनी भाग गए थे, जिस पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इस विवाद को देखते हुए राज्य सरकार ने तत्काल सफाई दी है और इस चूक को सुधारे जाने की बात कही है।


केरल के सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने इस ऐतिहासिक भूल को स्वीकार करते हुए कहा कि यह गलती कक्षा 4 के पर्यावरण अध्ययन की शिक्षक पुस्तिका के संशोधित मसौदे में हुई थी। उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट के जरिए जानकारी दी कि यह तथ्यात्मक त्रुटि है और इसके लिए केरल राज्य शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के एक सदस्य को जिम्मेदार ठहराया गया है।
मंत्री ने बताया कि जैसे ही मामला संज्ञान में आया, SCERT को निर्देश दिया गया कि वह तुरंत इस गलती को सुधारे और पुस्तिका को सही ऐतिहासिक तथ्यों के साथ पुनः प्रकाशित करे। संशोधित संस्करण अब आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।
शिवनकुट्टी ने कहा कि इस गलती के लिए जिम्मेदार SCERT पैनल के सदस्य पर भविष्य में किसी भी शैक्षणिक कार्य में भाग लेने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इतिहास से जुड़ी किसी भी जानकारी को राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं तोड़-मरोड़ती।
आरएसएस से जुड़े छात्र संगठन ABVP ने इस मसले पर सरकार की आलोचना की है। एबीवीपी के राष्ट्रीय सचिव श्रवण बी. राज ने कहा कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ करना हमेशा से CPI(M) का एजेंडा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ किताबों में झारखंड और असम के नक्शे तक को हटा दिया गया है। उन्होंने इसे देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाने वाला कदम बताया।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री शिवनकुट्टी ने कहा, राज्य सरकार केंद्र सरकार की तरह नहीं है जो राजनीतिक उद्देश्यों के लिए ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करती है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम संशोधन के दौरान बच्चों के सामने संवैधानिक मूल्यों और ऐतिहासिक तथ्यों को यथार्थ रूप में प्रस्तुत करने की नीति अपनाई गई है और आगे भी यही नीति जारी रहेगी।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसी ऐतिहासिक शख्सियत के बारे में की गई यह गलती न केवल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह बताती है कि इतिहास से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पर अत्यधिक सतर्कता और ज़िम्मेदारी जरूरी है।

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