
पूर्णिया:-30 मई(राजेश कुमार झा)सुबोध सिंह उर्फ दिलीप सिंह उर्फ बबुआ (42 वर्ष) जो देश के सबसे बड़े सोना-लूट गिरोह का सरगना है और गोल्डन थीफ के नाम से मशहूर है एक बार फिर सुर्खियों में है.क्राईम की दुनिया का ऐसा शख्स,जो बीते 08 वर्षों से देश के अलग-अलग जेलों में भले ही कैद है,लेकिन उसके गुर्गे बखूबी सोना-लूट की घटना को अंजाम दे रहे हैं.बात यह है कि हर लूटकांड का मास्टरमाइंड सुबोध सिंह ही होता है.ताजा मामला तेलांगना से जुड़ा हुआ है, जहां 03 मई को ज्योतिनगर, करीमगंज में 1.6 किलो सोने की लूट की घटना घटित हुई और पुलिस की तफ्तीश में इस लूट कांड का मास्टरमाइंड सुबोध सिंह ही निकला.सुबोध सिंह पूर्णिया सेंट्रल जेल में बंद था.जहां से उसे तेलंगाना पुलिस द्वारा 28 मई की शाम प्रोडक्शन वारंट पर करीमनगर ले जाया गया है. गौरतलब है कि पूर्णिया में 26 जुलाई 2024 को तनिष्क शोरूम से 02 करोड़ से अधिक मूल्य के जेवरात की लूट हुई थी.जिसका मास्टरमाइंड सुबोध ही था और इस मामले का वह नामजद अभियुक्त है.पूर्णिया केंद्रीय कारा के अधीक्षक मनोज कुमार कहते हैं कि सुबोध सिंह को लूट के एक मामले में प्रोडक्शन वारंट पर तेलांगना ले जाया गया है. न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद वापस पूर्णिया भेज दिया जाएगा.
तेलांगना के करीमगंज में ज्वेलरी लूट की हुई वारदात
03 मई 2026 को दिन के करीब 11 बजे बाइक से आए 05 अपराधियों ने करीमगंज के ज्योतिनगर स्थित पीएमजे ज्वेलर्स पर धावा बोला और 30 राउंड फायरिंग करने के बाद 1.6 किलो सोना लूटने में कामयाब रहा.इस घटना में ज्वेलर्स के 04 कर्मचारी भी घायल हो गए थे.इस लूटकांड में शामिल अपराधी पश्चिम बंगाल के रघुनाथ कर्मकार और महताब खान और बिहार के रविश कुमार को गिरफ्तार किया गया.गिरफ्तार अपराधियों ने पूछताछ में बताया कि इस लूटकांड की योजना पटना बेउर जेल में बंद सुबोध सिंह द्वारा बनाई गई थी और 15 मिनट में 15 किलो सोना लूटने का टारगेट दिया गया था.लेकिन दुकान के कर्मियों के विरोध की वजह से 1.6 किलो सोना लूटने में ही सफलता मिल सकी.रघुनाथ के अनुसार, उसकी मुलाकात सुबोध सिंह से बंगाल के आसनसोल जेल में हुई थी और उसके बाद से वह उसके गिरोह का सदस्य बन गया.सुबोध सिंह को प्रशासनिक कारणों से 11 मई को पटना बेउर जेल से पूर्णिया सेंट्रल जेल स्थानांतरित किया गया था और अब यहां से तेलांगना ले जाया गया है.
11 राज्यों में लगभग 300 किलो सोना लूट की घटना को दे चुका है अंजाम
सुबोध मूल रूप से बिहार के नालंदा जिला के चिश्तीपुर का निवासी है.बहरहाल उसके खिलाफ चार दर्जन से अधिक लूट और हत्या से जुड़े मामले थाने में दर्ज हैं.सुबोध ने वर्ष 1996 में अपराध की दुनिया से नाता जोड़ा और पहली बार वर्ष 2008 में कोलकाता में इंडियन ओवरसीज बैंक में डाका डालकर सुर्खियों में आया.उसके बाद वह खुद को सोना-लूट से जोड़ लिया और कई घटनाओं को अंजाम दिया.वर्ष 2018 में रूपसपुर, पटना में हुए सोना लूट के बाद सुबोध सिंह 18 किलो सोना के साथ एसटीएफ के हत्थे चढ़ा और तब से आजतक जेल के सलाखों के पीछे है. हैरान करने वाली बात यह है कि जेल में रहकर वह बखूबी अलग-अलग राज्यों में सोना-लूट को अंजाम दिला रहा है.उसके गिरोह के सदस्यों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है जो अभी 125 से अधिक बताई जा रही है.सुबोध अपने गैंग में युवा अपराधियों को शामिल करने में तरजीह देता है.सुबोध का गैंग अबतक बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल,मध्य प्रदेश, राजस्थान,हरियाणा, छत्तीसगढ़,महाराष्ट्र और अब तेलांगना में लूट को अंजाम दे चुका है.एक मोटे अनुमान के तौर पर इस गिरोह द्धारा अबतक 300 किलो से अधिक सोना लूटा जा चुका है.कुछ प्रमुख लूट की घटनाओं में 23 दिसंबर 2017 को आसनसोल में 56 किलो सोना,23 नवम्बर 2017 को हाजीपुर में 55 किलो सोना,29 अगस्त 2022 को उदयपुर में 24 किलो सोना,26 नवम्बर 2022 को कटनी में 16 किलो सोना और 09 नवंबर 2023 को देहरादून में 18 किलो सोना को लूटा गया.
पूर्णिया के बहुचर्चित तनिष्क शो रूम लूटकांड का मास्टरमाइंड था सुबोध
26 जुलाई 2024 को पूर्णिया के तनिष्क शोरूम में दिनदहाड़े 07 अपराधियों द्वारा 02 करोड़ से अधिक मूल्य के सोने और हीरे के जवाहरात को लूट लिया गया था.पुलिस-पड़ताल में यह तथ्य सामने आया था कि इस लूट की रणनीति बेउर जेल में सुबोध सिंह ने पूर्णिया के कुख्यात अपराधी बिट्टू सिंह के साथ मिलकर घटना से दो महीना पहले बनाया था.जिस समय यह लूट हुई उस समय सुबोध पश्चिम बंगाल के बर्धमान जेल में बंद था. इसलिए पूर्णिया की घटना में अधिकांश बंगाल के अपराधियों ने हिस्सा लिया था.इस लूट को स्थानीय स्तर पर मॉनिटर कर रहा अररिया निवासी अपराधी चुनमुन झा बाद में 22 मार्च 25 को अररिया में पुलिस एनकाउंटर में एसटीएफ द्वारा मारा गया था.चुनमुन 03 लाख रु का इनामी अपराधी था और आरा तनिष्क शोरूम लूट में भी शामिल था.तत्कालीन पुलिस अधीक्षक उपेन्द्र नाथ वर्मा के अनुसार,पूरे लूट के दौरान सुबोध सिंह का मुख्य शागिर्द प्रिंस राज इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए अपराधियों को निर्देश दे रहा था.गौरतलब है कि 06 फरवरी 2026 को प्रिंस राज वैशाली पुलिस द्वारा एनकाउंटर में मारा जा चुका है.लूट की वारदात के बाद सभी अपराधी पश्चिम बंगाल की सीमा में प्रवेश कर गया था.सुबोध सिंह इस लूटकांड का भी नामजद अभियुक्त है.
रेकी,अचूक रणनीति और आधुनिक तकनीक है कार्यशैली का हिस्सा
तनिष्क लूटकांड का खुलासा करते हुए तत्कालीन पूर्णिया एसपी उपेन्द्रनाथ वर्मा ने बताया था कि पूरी प्लानिंग के तहत इस लूट को अंजाम दिया गया,जिसमे सबसे अहम रेकी था.तीन दिनों तक स्थानीय अपराधियों द्वारा शोरूम की रेकी कराई गई.गैंग के सदस्यों को तीन टीम में बांटा गया था.पहली टीम के सदस्यों ने लाइनर का काम किया.दूसरी टीम ने लूट को अंजाम दिया जबकि तीसरी टीम ने लूटे हुए सोने को ठिकाने तक पहुंचाया.बताया जाता है कि सुबोध लूटे गए सोने को नेपाल में खपाता है और हवाला के जरिये पैसा प्राप्त करता है.सबसे अहम बात यह है कि लूट गिरोह का सदस्य एक दूसरे से मोबाइल के जरिए नहीं बल्कि टेलीग्राम और सिग्नल एप्प के माध्यम से संपर्क रखता है और इसी वजह से सुबोध अपने मिशन में अक्सर कामयाब रहता रहा है.

