पटना, 18 अक्टूबर (पटना डेस्क) विभूतिपुर सीट से भाकपा (माले) समर्थित वाम गठबंधन प्रत्याशी ने नामांकन के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए अपने भाषण में इसे केवल एक उम्मीदवार का समर्थन नहीं, बल्कि शोषितों, वंचितों और मेहनतकशों के हक की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि 16 अक्टूबर को नामांकन के दिन जो जनसैलाब उमड़ा, वह विभूतिपुर की जनता की चेतना का प्रतीक है, जो अब “धन और सत्ता के गठजोड़” को नकार चुकी है।

उन्होंने किसानों, मजदूरों, युवाओं और छात्रों के सवालों को उठाते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है कि किसानों को उनकी फसल का दाम, मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी, युवाओं को रोजगार और छात्रों को मुफ्त, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाए।
अपने पांच वर्षों के संघर्ष की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा, “मैं वादा नहीं, संकल्प करता हूँ कि विधानसभा में वही आवाज बनूंगा, जो जनता की आंखों में आंख डालकर सरकार से सवाल करे।”
उन्होंने विभूतिपुर की क्रांतिकारी विरासत का हवाला देते हुए शहीद रामनाथ महतो सहित 26 शहीदों को याद किया और कहा कि अब इस धरती पर शोषण की नहीं, जनता की सरकार चलेगी।
एनडीए की “डबल इंजन” सरकार पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार की जनता अब बेरोजगारी, महंगाई और निजीकरण की नीतियों से तंग आ चुकी है। महागठबंधन और तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए उन्होंने बदलाव का आह्वान किया।
“विभूतिपुर की जीत, जनता की जीत होगी।”

