
मधुबनी,निज संवाददाता। आज तक वीआईपी और वीवीआइपी को स्कार्ट करते हुए पुलिस गाड़ी को देखा गया था। लेकिन बिहार के मधुबनी जिले की पुलिस ने गांजा तस्कर को स्कॉर्ट कर एक नया
व्यवस्था बना दिया। उनके इस कार्यशैली ने पूरे बिहार पुलिस पर सवाल खड़े कर दिए है। आरोप है कि गांजा तस्करों को सुरक्षित रास्ता देने और उन्हें वीआईपी सुरक्षा की तहत एस्कॉर्ट करने में पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आई है। मामले में पटना एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए ‘डायल 112’ पुलिस वाहन को रंगे हाथ पकड़ लिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पटना एसटीएफ को सूचना मिली थी कि जिले में गांजा तस्करी का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है और कुछ पुलिसकर्मी भी इसमें सहयोग कर रहे हैं। इसके बाद विशेष निगरानी और जांच अभियान चलाया गया। जांच के दौरान कथित तौर पर सामने आया कि पुलिस की डायल 112 की गाड़ी आगे-आगे चल रही थी,जबकि पीछे गांजा से लदी पिकअप वाहन को सुरक्षित तरीके से ले जाया जा रहा था। एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए पूरे मामले का खुलासा किया। मामले में मधुबनी के एसपी योगेंद्र कुमार ने तत्काल प्रभाव से बासोपट्टी थानाध्यक्ष विकास कुमार और डायल 112 वाहन पर तैनात दरोगा हीरा पंडित को निलंबित कर दिया है। दोनों पर तस्करों के साथ सांठगांठ और कर्तव्य में गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार,पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ आगे और भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल इस खुलासे ने बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

