
पूर्णिया:-15 जून(राजेश कुमार झा)इन दिनों पूर्णिया नगर निगम में चल रहा भ्रष्टाचार का मामला अब सड़क पर आ चुका है.जनता नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने लगे है. निगम के सभी 46 वार्डों के हालात ऐसे है कि बिना नाक में रुमाल लिए शायद ही आप गुजर जायें.साफ-सफाई को लेकर नगर निगम में काम कर रहे दो एनजीओ सिर्फ निगम के कागजों में दिखाई दे रहे है. अगर कोई शिकायत लेकर निगम कार्यकाल पहुंच गए तो सुनने वाला भी शायद कोई नहीं मिलेगा.इस मामले को लेकर नगर आयुक्त कुमार मंगलम से कई बार बात करने की कोशिश की तो फोन ही रिसीव नहीं हुआ.भगवान भरोसे ही चल रहा है पूर्णिया का नगर निगम.बताते चलें कि नगर निगम में 435 टेंडर हुए है.इनमें वो टेंडर जिनकी अनुमानित टेंडर राशि 15 लाख से कम है.उनमें से अधिकतर टेंडर का काम नगर आयुक्त कुमार मंगलम के सबसे चहेते जुनियर इंजीनियर मनीष ही करते है. हालांकि निगम में कुल 6 जुनियर इंजीनियर कार्यरत है. लेकिन सबसे अधिक मेहरबानी जुनियर इंजीनियर मनीष पर है.क्योंकि नगर आयुक्त कुमार मंगलम को निगर निगम के 6 जुनियर इंजीनियरों सबसे सक्षम जुनियर इंजीनियर मनीष ही दिखाई देते है.दूसरी तरफ नगर आयुक्त कुमार मंगलम के राइट हैंड कहे जाने वाले नगर निगम के आउटसोर्सिंग कर्मी बाबू झा है.जो नगर निगम में है तो आउटसोर्सिंग लेकिन काम कर रहे है बीटेक,एमटेक,बीबीए और एमबीए जैसे तकनीकी योग्यताधारी का.कहने का मतलब जो काम बीटेक, एमटेक,बीबीए,एमबीए जैसे अन्य तकनीकी योग्यताधारी को करना चाहिए़ था.वो काम नगर आयुक्त कुमार मंगलम आउटसोर्सिंग कर्मी बाबू झा से करवा रहे है.कहने का मतलब नगर आयुक्त कुमार मंगलम की नजर में आउटसोर्सिंग कर्मी बाबू झा से ज्यादा योग्य दूसरा कोई हो ही नहीं सकता है.जिसको लेकर नगर निगम ने प्रमंडलीय आयुक्त के निर्देशों को भी ताक पर रख दिया है.बताते चलें कि प्रमंडलीय आयुक्त ने 23 मार्च 2026 को अपने निर्देश में साफ-साफ लिखा था कि आउटसोर्सिंग कर्मी बाबू झा से नियोजन,वित्तीय एवं तकनीकी तरह का कोई भी काम नहीं लिया जाय.लेकिन नगर आयुक्त कुमार मंगलम ने प्रमंडलीय आयुक्त के निर्देश को कूड़ेदानी में फेंक दिया.जो कहीं न कहीं प्रशासनिक जबावदेही पर गम्भीर सवाल खड़े कर रहे है.कहने का मतलब “न खाता न बही,जो नगर आयुक्त कहे वही सही”

