नई दिल्ली, 18 अक्टूबर (अशोक “अश्क”) भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए अब अमेरिकी डॉलर की जगह चीन की मुद्रा युआन में भुगतान शुरू कर दिया है। यह कदम डॉलर-आधारित वैश्विक व्यवस्था को चुनौती देने की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने हाल ही में दो से तीन रूसी तेल खेपों के लिए युआन में भुगतान किया है।

हालांकि रूस को भुगतान अब भी मुख्यतः रूसी रूबल में किया जा रहा है, लेकिन युआन का उपयोग बढ़ रहा है। रूस के उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने इस बदलाव की पुष्टि की है। यह भारत, चीन और रूस के बीच ब्रिक्स करेंसी के बिना भी उभरते आर्थिक त्रिकोण का संकेत देता है।
भारत द्वारा युआन में भुगतान का कदम ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और वर्तमान राष्ट्रपति-चुनाव डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिक्स देशों को चेतावनी दी थी कि यदि वे डॉलर का विकल्प लाते हैं तो अमेरिका 100% टैरिफ लगाएगा। यह ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति का हिस्सा है।
ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) देश अब वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में डी-डॉलरीकरण की ओर बढ़ रहे हैं। 2025 तक डॉलर का वैश्विक व्यापार में हिस्सा 73% से घटकर 54% रह गया है। ब्रिक्स ने अपनी संयुक्त मुद्रा की योजना फिलहाल रोक दी है और अब स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को प्राथमिकता दे रहा है।
भारत का युआन में भुगतान 2023 के बाद का बदलाव है, जब चीन के साथ तनाव के चलते सरकारी रिफाइनरियों ने युआन से लेनदेन रोक दिया था। अब फिर से यह भुगतान प्रणाली शुरू होना भारत-चीन संबंधों में नरमी का भी संकेत देता है।
भारत ने सितंबर 2025 में रूस से 2.5 बिलियन यूरो का तेल आयात किया, जो पिछले महीने की तुलना में 14% कम है। युआन में भुगतान न केवल भारत के लिए एक रणनीतिक संतुलन है, बल्कि यह डॉलर के प्रभुत्व को कमजोर करने की एक व्यावहारिक रणनीति भी है। यह कदम दिखाता है कि भारत अब अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए वैश्विक वित्तीय शक्ति संतुलन में नया अध्याय लिखने की ओर बढ़ रहा है।

