
पूर्णिया:-20 जून(राजेश कुमार झा)ये तो सत्य है कि बिहार में शराब बंदी के बाद से ही स्मैक,हेरोइन एवं ब्राउन शुगर जैसे सूखे नशे का चलन बहुत बढ़ गया है.शराब बंदी से पहले जब पूरे बिहार में खुलेआम लाइसेंसी दुकान से शराब की बिक्री होती थी तो उस वक्त बिहार में बहुत ही कम लोग स्मैक,हेरोइन एवं ब्राउन शुगर जैसे सूखे नशे के बारे में जानते थे.लेकिन आज के समय यानि शराब बंदी के बाद इन 10 सालों में स्मैक, हेरोइन एवं ब्राउन शुगर बिहार के गांव-गांव तक पहुंच गया है.स्थिति शराब से भी ज्यादा बदतर हो गई है.कारण शराब बंदी के बाद शराब के कारोबारियों को कोई भी ऐसा कारोबार नहीं मिला.जिसमें शराब से अधिक मुनाफा मिले.लिहाजा शराब के धंधे में लिप्त कारोबारियों ने शराब से ज्यादा मुनाफा कमाने वाला धंधा खोज लिया.उन्होंने ऐसे धंधे को अपने हाथों में लिया,जो पूरे देश में पूर्णतः बंद है.जिसका समाज में सबसे अधिक बुरा असर पड़ता है.लेकिन पैसे की लालच ने इन लोगों को इतना अंधा बना दिया कि अच्छे-बुरे का फर्क ही भूल गया.बताते चलें कि शराब बंदी के बाद धीरे-धीरे स्मैक की तस्करी शुरू हुई.लिहाजा तस्करों को बहुत ही कम समय में इस धंधे में बहुत ज्यादा फायदा होने लगा.जब सरकार की नजर पड़ी तो सरकार की सख्ती तो इन तस्करों की रफ्तार में बहुत कमी आई. उसके बाद स्मैक तस्करों ने इस धंधे को बढ़ाने के लिए इसका दूसरा रास्ता ढूंढ निकाला.स्मैक तस्करों ने इस धंधे में महिलाओं को सक्रिय कर तस्करी में उतार दिया. कारण पुलिस जल्दी महिलाओं पर शक नहीं करेगी और स्मैक की तस्करी भी आराम से होगी.स्मैक तस्करों ने स्नैक,हेरोइन एवं ब्राउन शुगर की स्मगलिंग से लेकर मार्केटिंग तक महिलाओं के जिम्मे दे दिया.तस्करों ने सबसे पहले अपने ही घरों की महिलाओं को इस तस्करी के धंधे में उतारा.उसके बाद बाहर से भी महिलाओं को धंधे में लगा दिया.जिसका नतीजा ये हुआ कि विगत 5 सालों में स्मैक,हेरोइन एवं ब्राउन शुगर की तस्करी में पुरुष से ज्यादा महिलाओं ने सबसे अधिक कारगर साबित हुई.पिछले 5 सालों में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं से स्मैक की बरामदगी हुई है.जिसका दुष्परिणाम ऐसा है कि बिहार के घर-घर तक ये नशा पहुंच चुका है.जिससे ऐसा लग रहा है कि अब वो दिन दूर नहीं की बिहार भी आने वाले समय में उड़ता बिहार न बन जाये. इसलिए समाज के सभी लोग मिलकर ये प्रण लें कि बिहार को उड़ता बिहार न बनने दें.

