
बिहार डेस्क पटना। उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा से जुड़े इलाकों में अचानक लागू की गई नई प्रशासनिक व्यवस्था ने लाखों लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कुशीनगर जिले के हनुमानगंज पुलिस ने बिहार-यूपी सीमा पर सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक आवागमन पर रोक लगा दी है। इस फैसले का सबसे अधिक असर बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के गंडक पार स्थित मधुबनी, पिपरासी, पिताहा और ठकराहा प्रखंडों के लोगों पर पड़ रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, कुशीनगर एसपी के निर्देश पर मुख्य मार्गों के अलावा कई संपर्क सड़कों पर भी बैरियर लगा दिए गए हैं। इसके कारण पिछले दो दिनों से सीमावर्ती क्षेत्रों में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना पूर्व सूचना के लागू की गई इस व्यवस्था से दैनिक जीवन प्रभावित हो गया है।
बाजार,पढ़ाई और इलाज आदि पर काफी असर पड़ा है। सीमा बंदी का सबसे व्यापक असर छात्रों, व्यापारियों, किसानों,मजदूरों और इलाज के लिए आने-जाने वाले मरीजों पर पड़ा है। बिहार और यूपी के सीमावर्ती गांवों के बीच बाजार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और खेती-बाड़ी को लेकर गहरी निर्भरता है। ऐसे में आवागमन बाधित होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जटहा बाजार व पिपरासी के व्यवसायियों ने इस व्यवस्था पर नाराजगी जताई है। व्यापारियों का कहना है कि वे रोजाना देर शाम तक कारोबार कर बिहार लौटते थे, लेकिन अब रात 8 बजे के बाद सीमा पार करने की अनुमति नहीं मिल रही है।
-किसानों की भी बढ़ी चिंता
सीमावर्ती क्षेत्रों के कई किसान अपनी खेती के लिए दूसरी तरफ की जमीन पर निर्भर हैं। सीमा पर रोक के कारण खेती-बाड़ी से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि यह व्यवस्था लंबे समय तक जारी रही तो खेती और व्यापार दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से व्यवस्था की समीक्षा कर आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उचित समाधान निकालने की मांग की है। वहीं प्रशासन की ओर से अभी तक इस प्रतिबंध को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

