
गोपालगंज,निज संवाददाता। जिला व सत्र न्यायाधीश दस की अदालत ने 54 वर्ष से लंबित भूमि बंटवारे से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए अपील को खारिज कर नया अध्याय लिख दिया। खास बात यह रही कि अदालत ने मामले को अपने समक्ष लेने के बाद मात्र एक माह के भीतर सुनवाई पूरी कर निर्णय सुना दिया, जिसकी कानूनी जगत में व्यापक चर्चा हो रही है। यह मामला टाइटल अपील संख्या 230/1971 से संबंधित था,जो छपरा के उप न्यायाधीश-2 द्वारा टाइटल सूट संख्या 59/1965 में पारित निर्णय के विरुद्ध दायर की गई थी। मूल विवाद भूमि के बंटवारे को लेकर था। निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए वर्ष 1971 में अपील दायर की गई थी,जो वर्षों तक लंबित रही। मामले की सुनवाई गोपालगंज के जिला एवं सत्र न्यायाधीश-10 की अदालत में हुई। अपील में राजबली पाल एवं अन्य अपीलकर्ता थे। वही जितेंद्र पाल एवं अन्य प्रतिवादी पक्ष में थे। अपीलकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता बच्चा सिंह तथा प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ता शैलेंद्र बहादुर मिश्रा ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी पक्षों की दलीलों,उपलब्ध साक्ष्यों और अभिलेखों का गहन परीक्षण किया। इसके बाद न्यायालय ने अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पांच दशक से अधिक समय से लंबित मामले का इतने कम समय में निस्तारण न्यायिक कार्यक्षमता का सकारात्मक उदाहरण है। इस फैसले के साथ भूमि बंटवारे को लेकर चली आ रही लंबी कानूनी लड़ाई का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया। अदालत के इस निर्णय की चर्चा न्यायिक और सामाजिक हलकों में व्यापक रूप से हो रही है।

