
गोपालगंज,निज संवाददाता। नेपाल के तराई इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने गोपालगंज के दियारा इलाके की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गंडक नदी के जलस्तर में तेज वृद्धि के बाद सदर और मांझा प्रखंड के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल रहा है। दर्जनों गांव जलमग्न हो चुके हैं और कई गांवों की मुख्य सड़कें पूरी तरह पानी में डूब गई हैं। हालात ऐसे हैं कि चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है और ग्रामीणों का सामान्य जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है।
-गांवों में 3 से 5 फीट तक पानी, संपर्क हुआ बाधित
बाढ़ का सबसे अधिक असर रामनगर,मेहंदिया,जगिरी टोला, खाप मकसूदपुर,कमल चौधरी के टोला,रामपुर टेंगराही,राजवाही और नेमुईया समेत आसपास के दियारा क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। कई गांवों की मुख्य सड़कों पर तीन से पांच फीट तक पानी बह रहा है। इसके कारण करीब दो दर्जन गांवों का प्रखंड और जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क प्रभावित हो गया है।
ग्रामीणों को जरूरी सामान लाने के लिए भी पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की परेशानी सबसे अधिक बढ़ गई है। कई स्थानों पर आवागमन के लिए नाव की जरूरत महसूस हो रही है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि पर्याप्त नाव की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें जान जोखिम में डालकर पानी पार करना पड़ रहा है।
-स्कूल,आंगनबाड़ी व स्वास्थ्य केंद्र भी पानी में डूबे
बाढ़ के पानी ने गांवों की बुनियादी व्यवस्था को भी प्रभावित कर दिया है। कई प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के साथ प्लस-टू विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र और हेल्थ सेंटर पानी से घिर गए हैं। इससे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
लगातार पानी जमा रहने के कारण कई कच्चे और पक्के मकानों की नींव कमजोर पड़ने लगी है। ग्रामीणों के बीच घर गिरने का डर बना हुआ है। वहीं, बाढ़ के पानी में सांप और अन्य जहरीले जलीय जीव-जंतुओं के निकलने से लोगों की चिंता और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय घरों में रहना भी सुरक्षित नहीं लग रहा है।
-हर साल घर और मेहनत की कमाई नदी में समा जाती है’
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों में प्रशासनिक स्तर पर राहत नहीं मिलने को लेकर नाराजगी भी है। ग्रामीणों का आरोप है कि आपदा की स्थिति के बावजूद अब तक पर्याप्त राहत सामग्री, सुरक्षित स्थान और नाव की व्यवस्था नहीं की गई है। हालांकि अंचलाधिकारी ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें तत्काल राहत की जरूरत है।
पीड़ित ग्रामीण रामसेवक महतो ने कहा, “हर साल हम अपना सब कुछ गंवा बैठते हैं। खून-पसीने की कमाई से बनाए गए घर नदी के पानी में समा जाते हैं। बारिश के दिनों में हमें हाईवे और तटबंधों पर शरण लेनी पड़ती है। हर साल यही स्थिति होती है, लेकिन अब तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।”
-हर साल दियारा में लौटती है,बाढ़ की त्रासदी
गंडक के दियारा इलाके में बाढ़ कोई नई समस्या नहीं है। हर साल नेपाल के तराई क्षेत्र में भारी बारिश और गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि के बाद गोपालगंज के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को बाढ़ की मार झेलनी पड़ती है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी ग्रामीणों के सामने घरों की मरम्मत, फसल बर्बादी और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाता है।
फिलहाल ग्रामीणों की नजर प्रशासन की ओर है। प्रभावित इलाकों में तत्काल नाव, राहत सामग्री, सुरक्षित आश्रय स्थल और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है। साथ ही दियारा क्षेत्र के लोगों का कहना है कि हर साल आने वाली इस आपदा से स्थायी निजात के लिए सरकार को दीर्घकालिक बाढ़ नियंत्रण और तटबंध सुदृढ़ीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।

