एच1बी वीजा फीस में बढ़ोतरी और FII की बिकवाली से टूटा रुपया, डॉलर के मुकाबले पहुंचा अब तक के सबसे निचले स्तर पर

नई दिल्ली, 23 सितम्बर (अशोक “अश्क”) मंगलवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। एच1बी वीजा फीस में बढ़ोतरी, अमेरिकी टैरिफ नीतियों में बदलाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने भारतीय मुद्रा पर दबाव बना दिया है। हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन, शुरुआती ट्रेडिंग में रुपया 25 पैसे टूटकर 88.53 पर आ गया, जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर है।


इंटरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Interbank Forex Market) में डॉलर के मुकाबले रुपया 88.41 पर खुला और थोड़ी ही देर में फिसलकर 88.53 के स्तर पर आ गया। यह स्तर सोमवार के बंद भाव 88.28 से 25 पैसे कमजोर है। सोमवार को भी रुपया 12 पैसे टूट गया था, जिससे साफ है कि लगातार विदेशी दबाव भारतीय मुद्रा को कमजोर कर रहा है।
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका द्वारा एच1बी वीजा फीस में बढ़ोतरी और टैरिफ पॉलिसी में सख्ती से निवेशकों का विश्वास डगमगाया है। इससे न केवल विदेशी निवेशकों का मूड बिगड़ा है, बल्कि FII द्वारा भारी बिकवाली ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनाया है। सोमवार को FII ने ₹2,910.09 करोड़ के शेयर बाजार से निकाले, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ी।
छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.03% गिरकर 97.30 पर आ गया है। हालांकि यह गिरावट मामूली है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय रुपये पर असर पड़ा है। इस समय वैश्विक बाजार में अस्थिरता और अमेरिका की नीतियों में बदलाव विकासशील देशों की मुद्राओं को कमजोर कर रहे हैं।
रुपये की कमजोरी के बीच घरेलू शेयर बाजारों में हल्की तेजी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 100 अंक ऊपर चढ़ा, जबकि एनएसई निफ्टी 50 ने 24,250 का स्तर पार किया। ऑटो सेक्टर में खासतौर पर मारुति के शेयरों में लगभग 2% की तेजी दर्ज की गई, लेकिन आईटी सेक्टर के शेयरों पर दबाव रहा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड 0.62% गिरकर 66.16 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। हालांकि, रुपये की कमजोरी के चलते भारत को कच्चा तेल आयात करने में अधिक भुगतान करना पड़ेगा। भारत दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए रुपये में गिरावट का सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा।
रुपये की गिरावट का सीधा प्रभाव आम जनता की जेब पर पड़ेगा। इंपोर्टेड सामान जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल उपकरण और मशीनरी महंगे हो सकते हैं। डॉलर की तुलना में रुपया कमजोर होने से विदेश यात्रा और विदेशों में पढ़ाई करने वाले छात्रों का खर्च भी बढ़ेगा।
इसके अलावा, चूंकि सोने की कीमतें डॉलर में तय होती हैं, रुपये में कमजोरी से सोना और महंगा हो सकता है।
रुपये की यह ऐतिहासिक गिरावट भारत की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। अगर विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसे निकालते रहे और अमेरिका की सख्त नीतियां जारी रहीं, तो आने वाले समय में रुपया और नीचे जा सकता है। इससे न केवल वित्तीय बाजार प्रभावित होंगे, बल्कि आम लोगों की खर्च क्षमता पर भी गहरा असर पड़ेगा।

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