
बिहार का तीसरा सबसे बड़ा मेडिकल हब कहे जाने वाले पूर्णिया का लाइन बाजार, जहां की दर्जनों तंग गलियों में नगर निगम के नियम एवं फायर सेफ्टी की सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर बहुमंजली इमारतों का निर्माण किया गया है.जहां सुरक्षा मानकों को ताक पर रख कर दर्जनों छोटे-बड़े नर्सिंग होम, लॉज,गेस्ट हाउस एवं रेस्टोरेंट धड़ल्ले से चल रहे है.यहां हर दिन बंगाल,नेपाल और बिहार के कई राज्यों से तकरीबन 10 हजार से अधिक रोगी अपना इलाज कराने आते है और ठहरते भी है.सुरक्षा की दृष्टि से यहाँ कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है.कारण लाइन बाजार के तंग गलियों में ऐसे दर्जनों बहुमंजली इमारतें है,जहां दर्जनों छोटे-बड़े नर्सिंग होम,लॉज एवं गेस्ट हाउस बिना सुरक्षा मानकों के धड़ल्ले से चल रहा है.जहां एंबुलेंस को भी जाने में काफी मशक्कत उठानी पड़ती है.रोगी को उन गलियों में बने नर्सिंग होम में ठेले, रिक्शा या स्ट्रेचर से ले जाने पड़ते है.जाहिर सी बात है कि अगर उन तंग गलियों में बने बहुमंजली इमारतों में चल रहे नर्सिंग होम में कोई दुर्घटना हो जाए तो यह कोई बड़ी आश्चर्य की बात नहीं होगी.अगर किसी भी तरह की कोई दुर्घटना हो गई तो बाहर से उन्हें मदद के लिए किसी भी तरह कोई उपाय भी जल्दी संभव नहीं हो सकता है. क्योंकि गलियाँ इतनी तंग है कि फायर बिग्रेड की गाड़ी तो बहुत दूर वहां एम्बुलेंस को भी पहुंचने में काफी मशक्कत का सामना करना पड़ेगा.सूत्रों के मुताबिक मेडिकल हब कहे जाने वाले लाइन बाजार में तकरीबन 65 से अधिक बहुमंजिला इमारतें है.जहां 95 प्रतिशत इमारतों की सुरक्षा मानक सिर्फ़ कागजों तक ही सीमित है.जिसमें लगभग सभी इमारतों में मेडिकल शॉप,पैथोलॉजी, छोटे-बड़े नर्सिंग होम,लॉज गेस्ट हाउस एवं रेस्टोरेंट बिना सुरक्षा मानकों की भगवान भरोसे चल रही है.सूत्रों की मानें तो लाइन बाजार में तकरीबन 1000 से अधिक डाक्टर,2500 से अधिक मेडिकल शॉप,सैकड़ों छोटे-बड़े पैथोलॉजी एवं एक्सरे चल रहे है.लेकिन सुरक्षा मानकों के नाम पर सब टांय-टांय फिस्स.अगर सही में जिला प्रशासन फिजिकली सबों की जांच करे तो 95 प्रतिशत प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सिर्फ कागजों में ही दिखाई देगी.जो कि किसी भी बड़ी दुर्घटना को निमंत्रण देने के लिए काफी है.अगर वक्त रहते इन सबों पर काबू नहीं किया गया तो यहां पर कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना होने की संभावना बन सकती है.

